
चेन्नई, 21 अप्रैल . आयकर विभाग ने मद्रास हाई कोर्ट को उदयनिधि स्टालिन के चुनावी हलफनामों में स्पष्ट विसंगतियों के बारे में सूचित किया है. इसमें विशेष रूप से 2021 और 2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान निवेश, ऋण और वित्तीय खुलासों के संबंध में जानकारी है. अब इस मामले की सुनवाई चार हफ्तों के लिए टाल दी गई है.
विभाग ने कोर्ट में दायर एक जवाबी हलफनामे में कहा कि रेड जायंट मूवीज में 7.36 करोड़ रुपए का निवेश, जिसका खुलासा स्टालिन ने अपने 2021 के हलफनामे में किया था, उनके 2026 के घोषणापत्र में दिखाई नहीं देता है. साथ ही, नवीनतम हलफनामे में उसी कंपनी में उनकी पत्नी के नाम पर 2.63 करोड़ रुपए के निवेश का उल्लेख है, जिसकी जानकारी पहले नहीं दी गई थी.
विभाग ने बताया कि ये अंतर, वित्तीय रिकॉर्ड में अन्य विसंगतियों के साथ मिलकर, इस चरण में किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल बनाते हैं. यह हलफनामा आयकर महानिदेशक (जांच), तमिलनाडु और पुडुचेरी की ओर से प्रस्तुत किया गया था.
इस दौरान ऋण संबंधी खुलासों को लेकर भी सवाल उठाए गए. जहां स्टालिन के 2026 के हलफनामे में 10 करोड़ रुपए के ऋण का उल्लेख है, वहीं 2021 की फाइलिंग में लगभग 11.06 करोड़ रुपए की देनदारियों को दर्ज किया गया था.
हालांकि, कंपनी के वित्तीय विवरण लगभग 17.69 करोड़ रुपए के उधार का संकेत देते हैं. विभाग ने कहा कि विस्तृत और पूर्ण रिकॉर्ड तक पहुंच के बिना, इन आंकड़ों का सटीक मिलान करना संभव नहीं है.
मामले को और अधिक जटिल बनाते हुए, विभाग ने पाया कि आयकर रिटर्न आईटीआर-2 प्रारूप का उपयोग करके दाखिल किए गए थे, जिसमें बैलेंस शीट जमा करना अनिवार्य नहीं है. परिणामस्वरूप, निवेश और देनदारियों का स्वतंत्र सत्यापन सीमित रहता है. हलफनामे में दस्तावेजीकरण में कमियों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें कुछ संस्थाओं के लिए ऑडिट किए गए वित्तीय विवरणों की अनुपस्थिति भी शामिल है.
इसके अतिरिक्त, इसमें उल्लेख किया गया कि स्टालिन की पत्नी ने संबंधित मूल्यांकन वर्ष के लिए आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था, जिससे संबंधित वित्तीय प्रविष्टियों की जांच सीमित हो गई.
कोर्ट चेन्नई के मतदाता आर. कुमारवेल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जो चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी निर्वाचन क्षेत्र से हैं और जिन्होंने स्टालिन की संपत्ति घोषणाओं में कथित विसंगतियों की विस्तृत जांच की मांग की है.
याचिका में हलफनामों और कॉर्पोरेट रिकॉर्डों के बीच ‘अहम विसंगतियों’ का जिक्र किया गया है, जिसमें घोषित संपत्तियों का गायब होना और देनदारियों में बिना किसी स्पष्टीकरण के बदलाव शामिल हैं.
इससे पहले, 15 अप्रैल को, हाई कोर्ट ने आयकर विभाग को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा था. अब इस मामले की सुनवाई चार हफ्तो के लिए टाल दी गई है.
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एएसएच/एबीएम