
अलीगढ़, 16 अप्रैल . महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद का विशेष सत्र Thursday से शुरू हो गया है. तीन दिवसीय इस सत्र को लेकर आधी आबादी में खुशी की लहर है तो वहीं कुछ Political दलों की ओर से इस सत्र का विरोध जताया जा रहा है.
मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने इस सत्र को महिलाओं के हक में सही बताते हुए कहा कि इस बिल को पारित होना चाहिए, कानून बनना चाहिए और आधी आबादी को हक मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है कि इस बिल को कानून का रूप नहीं लेना चाहिए, तो इससे एक चीज साफ है कि वह नहीं चाहते हैं कि महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़े.
मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने से बातचीत में कहा कि यह बिल महिलाओं की छवि को बदलने वाला है. महिलाओं पर अन्याय और क्रूरता हो रही है. इस बिल से महिलाओं को न्याय मिलेगा.
उन्होंने कहा कि यह बिल समानता, न्याय, सामाजिक न्याय और सुरक्षा में बहुत अहम भूमिका निभाएगा. कई लोग और नेता महिलाओं के पक्ष में बोलते हैं, लेकिन जब कानून बनता है और महिलाओं को उनके अधिकार कानूनी रूप से दिए जाते हैं, ताकि वे अपनी समस्याओं को संसद तक उठा सकें, तब मुद्दा उठता है.
मौलाना ने कुछ इस्लामी धार्मिक नेताओं के उस नजरिए पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कहना कि इस्लाम में महिलाओं को केवल घर-परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी दी गई है और राजनीति में दखल देना सही नहीं है, यह नजरिया इस्लाम के खिलाफ है.
इस्लाम ने महिलाओं को समानता का अधिकार दिया है. सलाह-मशवरे में उन्हें बराबर का दर्जा दिया गया और समाज सेवा में भी समानता दी है. महिलाओं का बहिष्कार नहीं किया गया है.
मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने कहा कि इस्लाम में ऐसी कोई बात नहीं है जो महिलाओं के साथ अन्याय, जुल्म और नाइंसाफी को उकसाए. बल्कि इस्लाम अन्याय को बहुत बड़ी नाइंसाफी मानता है और जुल्म को गंभीर पाप बताता है, इसलिए इस्लाम समानता, न्याय और सामाजिक सेवा का आदेश देता है.
उन्होंने कहा कि महिलाओं के हित में महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया जाना चाहिए.
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डीकेएम/डीकेपी