
वॉशिंगटन, 27 अप्रैल . अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने Monday को कहा कि ईरान के अंदरूनी मतभेद ही वॉशिंगटन के साथ किसी भी समझौते में सबसे बड़ी रुकावट हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेहरान पर समझौता करने का दबाव बढ़ रहा है.
Monday को फॉक्स न्यूज के ट्रे यिंगस्ट को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ईरान की सत्ता व्यवस्था बहुत बंटी हुई है, जिससे बातचीत करना मुश्किल हो जाता है. उनके अधिकारी जो वादे करते हैं, उन पर अमल करना भी सीमित हो जाता है.
रुबियो ने कहा, “इस बात के अलावा कि देश पर कट्टर शिया मौलवियों का राज है, यह अपने आप में एक बहुत बड़ी रुकावट है. दूसरी बात यह है कि वे अंदरूनी तौर पर बहुत ज्यादा बंटे हुए हैं, और मुझे लगता है कि ऐसा हमेशा से रहा है, लेकिन अब यह कहीं ज्यादा साफ तौर पर दिखाई देता है.”
उन्होंने कहा कि ईरान के नेतृत्व में असली तौर पर कोई नरम या उदार गुट नहीं है.
रुबियो ने कहा, “ईरान को समझने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अब वहां एक Political वर्ग है. मुझे लगता है कि देखिए, लोग नरमपंथियों और कट्टरपंथियों की बात करते हैं. ईरान में सभी कट्टरपंथी ही हैं, लेकिन कुछ कट्टरपंथी ऐसे हैं जो समझते हैं कि उन्हें देश और अर्थव्यवस्था चलानी है, और कुछ कट्टरपंथी ऐसे हैं जो पूरी तरह से धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हैं.”
उन्होंने कहा कि एक तरफ वे लोग हैं जो Government और देश चलाने की जिम्मेदारी समझते हैं, और दूसरी तरफ वे जो सिर्फ अपनी विचारधारा के हिसाब से चलते हैं. इसी वजह से अंदर लगातार तनाव बना रहता है.
उन्होंने कहा कि जो कट्टरपंथी धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हैं, वे सिर्फ आईआरजीसी के अधिकारी ही नहीं हैं, बल्कि जाहिर तौर पर सर्वोच्च नेता और उनके आसपास का परिषद भी है. फिर आपके पास Political वर्ग है – विदेश मंत्री, President, और संसद के स्पीकर. ये लोग भी कट्टरपंथी ही हैं, लेकिन ये भी समझते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था भी चलनी चाहिए.
इसलिए आप देखते हैं कि एक तरफ ऐसे कट्टरपंथी हैं जो देश चलाने और समझौते करने की कोशिश करते हैं, और दूसरी तरफ वे हैं जिन्हें किसी भी व्यावहारिक बात की परवाह नहीं है और जिनकी सोच ज्यादा विचारधारात्मक और चरम है.
रुबियो के अनुसार, अंत में सत्ता का झुकाव उन्हीं कट्टर विचारधारा वाले लोगों की तरफ होता है. दुर्भाग्य से वही लोग जिनकी सोच बहुत कट्टर और भविष्य को लेकर बेहद चरम है, उनके पास देश में अंतिम शक्ति होती है.
उन्होंने बताया कि यही अंदरूनी स्थिति अमेरिका के लिए बातचीत को मुश्किल बना देती है, क्योंकि ईरानी प्रतिनिधियों को पहले अपने ही सिस्टम के अंदर अलग-अलग लोगों से मंजूरी लेनी पड़ती है, इसलिए हमारी बातचीत सिर्फ बाहर के ईरानियों से नहीं होती. उन्हें पहले अपने ही अंदर दूसरों से बात करनी पड़ती है कि वे क्या मान सकते हैं, क्या पेश कर सकते हैं, क्या करने को तैयार हैं, और यहां तक कि किससे मिल सकते हैं.
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी रोक हटाता है, तो वह होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है. हालांकि इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई रियायत शामिल नहीं है.
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एवाई/डीकेपी