
भागलपुर, 26 जून . पद्मश्री से सम्मानित और पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस-चांसलर डॉ. बीएस ढिल्लों ने कहा कि India को प्राकृतिक-ऑर्गेनिक खेती, बेहतर गुणवत्ता वाली उपज और आधुनिक कृषि तकनीकों के संतुलित उपयोग के जरिए कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश की कृषि व्यवस्था को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी नवाचार दोनों की जरूरत है.
डॉ. ढिल्लों ने भागलपुर में से बातचीत के दौरान कहा कि वे पहली बार बिहार नहीं आए हैं और इससे पहले भी कई बार राज्य का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि उनका बिहार और पंजाब दोनों से गहरा जुड़ाव रहा है. उन्होंने कृषि और मिट्टी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय कृषि परंपरा केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक “सांस्कृतिक और वैज्ञानिक धरोहर” है.
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय उनके लिए मंदिर के समान हैं, जहां कृषि वैज्ञानिक लगातार शोध और नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन संस्थानों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है.
डॉ. ढिल्लों ने कहा कि पंजाब और बिहार जैसे राज्यों में कृषि की संभावनाएं बहुत अधिक हैं. यदि किसानों को सही तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो उत्पादन में बड़ा सुधार संभव है. उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों को विशेष सहायता की आवश्यकता है, क्योंकि उनके पास संसाधन सीमित होते हैं.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब में प्रति हेक्टेयर लगभग 120 क्विंटल गेहूं का उत्पादन होता है, जबकि प्राकृतिक खेती में थोड़ा कम उत्पादन हो सकता है, लेकिन इसमें लागत काफी कम हो जाती है. उन्होंने कहा कि किसानों को केवल उत्पादन नहीं, बल्कि लाभ और बचत दोनों को समझना होगा.
उन्होंने यह भी कहा कि खेती में पानी की कमी एक गंभीर समस्या है, विशेषकर पंजाब जैसे राज्यों में. इस समस्या के समाधान के लिए Government, विश्वविद्यालय और किसानों को मिलकर काम करना होगा. उन्होंने कहा कि नीति निर्माण में भी कृषि की वास्तविक चुनौतियों को ध्यान में रखना चाहिए.
डॉ. ढिल्लों ने आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बायोटेक्नोलॉजी और नैनो टेक्नोलॉजी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन तकनीकों का उपयोग कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. हालांकि, इसके लिए पर्याप्त निवेश और संसाधनों की आवश्यकता होती है.
उन्होंने कहा कि India अपने संसाधनों के आधार पर धीरे-धीरे कृषि क्षेत्र में प्रगति कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और शोध संस्थानों को मजबूत करने के लिए Government लगातार प्रयास कर रही है और समय के साथ कृषि विश्वविद्यालयों के बजट और संसाधनों में वृद्धि हुई है.
उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और किसानों का सहयोग इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो India का कृषि क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत स्थिति हासिल करेगा.
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पीआईएम/एएस