टीम के प्रदर्शन से खुश हूं, शेफाली ने पूरे टूर्नामेंट में बल्ले और गेंद से जिम्मेदारी ली: हरमनप्रीत कौर

Dubai , 13 सितंबर . भारतीय टीम ने फाइनल मुकाबले में श्रीलंका को 72 रनों से रौंदते हुए रिकॉर्ड 8वीं बार विमेंस एशिया कप के खिताब को अपने नाम किया. भारतीय टीम से मिले 184 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की पूरी टीम 111 रन बनाकर सिमटी. भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम के प्रदर्शन से बेहद खुश नजर आईं और उन्होंने खासतौर पर शेफाली वर्मा के प्रदर्शन की जमकर प्रशंसा की.

मैच के बाद हरमनप्रीत कौर ने कहा, “हम जानते हैं कि वे (श्रीलंका) एक बेहतरीन टीम हैं. मगर हमने अपने स्टैंडर्ड के हिसाब से खेला. हमने अपने लिए ऊंचे स्टैंडर्ड तय किए हैं और हम उन्हें बनाए रखना चाहते थे. मैं टीम के प्रदर्शन से बेहद खुश हूं. ओपनर्स ने हमारे लिए बहुत अच्छा काम किया. शेफाली और स्मृति ने जिस तरह से बैटिंग की, वह शानदार था. यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि शेफाली जैसी खिलाड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में बल्ले और गेंद से जिम्मेदारी ली.”

भारतीय टीम के कोच अमोल मजूमदार ने भी टीम के प्रदर्शन की सराहना की. उन्होंने कहा, “सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ पर बहुत गर्व है. आज पिच बहुत शानदार थी और हमने अच्छा प्रदर्शन किया. हमारी बैटिंग बहुत मजबूत थी. हमने बहुत अच्छी शुरुआत की. अगर आप पिछले दो हफ्तों को देखें, तो पिच थोड़ी धीमी रही है और काफी टर्न भी हुआ है. इसलिए बड़ा स्कोर बनाना और उसे डिफेंड करना बड़ी बात है. हमारे पास तीन अच्छे स्पिनर थे, तो यही हमारी रणनीति थी.”

शेफाली और मंधाना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “शेफाली का अपना स्टाइल है, उनमें पावर है, वह विरोधी टीम को बैकफ़ुट पर धकेल देती हैं. स्मृति में भी वह हुनर ​​है, वे एक-दूसरे का बहुत अच्छा साथ देती हैं. हमने दिसंबर में श्रीलंका के खिलाफ हुई पांच मैचों की सीरीज को याद किया और देखा कि कैसे हमने चमारी अटापट्टू को आउट किया था, जो उनके लिए एक अहम खिलाड़ी हैं. यही प्लान था और खुशी है कि दीप्ति ने इसे बखूबी अंजाम दिया.”

टीम की जीत के बाद ऋचा घोष ने कहा, “माहौल बहुत शानदार रहा, जिस तरह से फैंस ने आकर हमारा हौसला बढ़ाया. शुरुआत में गेंद अच्छी तरह से आ रही थी, लेकिन बाद में धीमी हो गई. हमारी बल्लेबाजों ने बहुत अच्छा खेला और हमें पता था कि अगर हमें कुछ विकेट मिल जाएं, तो हम उन्हें रोक पाएंगे. मुझे जो भूमिका दी गई है, उसमें रन बनाने से टीम को मदद मिलती है. हम टीम के तौर पर चर्चा करेंगे कि जश्न कैसे मनाएंगे. अभी तक इस बारे में सोचा नहीं है, मैच अभी-अभी खत्म हुआ है.”

जी कमलिनी ने टीम के चैंपियन बनने के बाद कहा, “यह एक अलग ही एहसास है. मुझे अभी भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है. मैं 18 साल की लड़की हूं. यहां कई सीनियर खिलाड़ी हैं. मैंने उनसे मानसिक तौर पर बहुत कुछ सीखा है. मुझे लगता है कि सीनियर खिलाड़ियों की सोच यह होती है कि चाहे वे 100 रन पर आउट हों या 0 पर, उनकी सोच एक जैसी ही रहती है, मैंने उनसे यही सीखा है.”

एसएम/डीकेपी

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