‘भारत ने देखा, इंडिया ने हराया’, लोकसभा में संविधान संशोधन बिल गिरने पर राहुल गांधी का बयान

New Delhi, 17 अप्रैल . Lok Sabha में Friday को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. इस बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन Government आवश्यक समर्थन जुटाने में विफल रही.

मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया, जिसके चलते यह विधेयक पास नहीं हो पाया. इस अहम विधेयक के गिरने के बाद Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रतिक्रिया सामने आई है.

Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हुए इस हमले को हरा दिया है. हमने साफ तौर पर कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह India की Political संरचना को बदलने का एक तरीका है. हमने इसे रोक दिया है. Prime Minister Narendra Modi से अपील करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 2023 में लाए गए महिला बिल को लागू किया जाए, जिस पर पूरा विपक्ष समर्थन देने को तैयार है.

वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का सवाल नहीं था, बल्कि देश के लोकतंत्र और अखंडता से जुड़ा विषय था. उन्होंने कहा कि हम कभी इससे सहमत नहीं हो सकते कि महिला आरक्षण को परिसीमन से इस तरह जोड़ा जाए कि वह पुरानी जनगणना पर आधारित हो, जिसमें ओबीसी वर्ग शामिल ही नहीं है. ऐसे में इस बिल का पारित होना संभव नहीं था.

बिल के गिरने पर ‘एक्स’ पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, “संशोधन विधेयक गिर गया. उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया. India ने देख लिया. इंडिया ने रोक दिया. जय संविधान.”

प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए बड़ी जीत करार दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष शुरू से ही इस बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहा था और अंततः संसद में यह बिल पास नहीं हो सका.

तमिलनाडु के Chief Minister एमके स्टालिन ने लिखा, “तमिलनाडु ने दिल्ली को हराया! 23 अप्रैल को हम दिल्ली के घमंड को और उस घमंड को सपोर्ट करने वाले गुलामों को एक साथ हराएंगे!”

बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 368 के उपबंधों के अनुसार, सभा की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा और सभा के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो तिहाई बहुमत द्वारा विधेयक पारित नहीं हुआ.

पीएसके/डीएससी

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