
New Delhi, 2 जुलाई . Prime Minister Narendra Modi और जापान की Prime Minister सनाए ताकाइची ने Thursday को पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई.
New Delhi में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने कहा कि वे ऐसे किसी भी एकतरफा कदम का कड़ा विरोध करते हैं जो समुद्री और हवाई आवाजाही की सुरक्षा और आजादी को खतरे में डालता हो या फिर ताकत या दबाव के जरिए मौजूदा स्थिति बदलने की कोशिश करता हो.
बयान में कहा गया, “दोनों नेताओं ने विवादित इलाकों में बढ़ते सैन्यीकरण पर भी गंभीर चिंता जताई. समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होना चाहिए, जैसा कि यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनसीएलओएस) में तय किया गया है.”
दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के मुताबिक उत्तर कोरिया को पूरी तरह परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि उत्तर कोरिया से और उत्तर कोरिया तक परमाणु और मिसाइल तकनीक के फैलाव को लेकर लगातार बनी हुई चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए.
उन्होंने सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील की कि वे सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करें. इसमें उत्तर कोरिया को हथियार और उससे जुड़ा कोई भी सामान भेजने या वहां से खरीदने पर लगी रोक भी शामिल है. दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि अपहरण से जुड़े मामलों का जल्द से जल्द समाधान होना जरूरी है.
दोनों Prime Minister ने म्यांमार की स्थिति और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने और ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जिससे सभी हितधारकों के बीच बातचीत हो सके और म्यांमार के नेतृत्व में, म्यांमार की भागीदारी से एक शांतिपूर्ण और लंबे समय तक टिकने वाला समाधान निकले.
दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में स्थायी शांति और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई. ईरान से जुड़े हालात पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करना, ऊर्जा और दूसरी जरूरी चीजों की सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर ‘यूएनसीएलओएस’ का पालन करना बेहद जरूरी है.
दोनों नेताओं ने गाजा के पुनर्निर्माण की व्यापक योजना को आगे बढ़ाने और दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) के वादे को पूरा करने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जल्द से जल्द स्थिरता बहाल करने और लंबे समय तक शांति कायम करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं.
Prime Minister मोदी और Prime Minister ताकाइची ने यूक्रेन में भी अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का समर्थन किया. उन्होंने इस दिशा में अलग-अलग देशों द्वारा किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी.
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एवाई/एबीएमो