
New Delhi, 30 जुलाई . India और जर्मनी के बीच उद्योग, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईजीसीसी) ने आईजीसीसी इंडस्ट्री डायलॉग 2026 के दूसरे संस्करण का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में दोनों देशों के नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की.
इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईजीसीसी) के महानिदेशक जान नोएथर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि India आने के दो सप्ताह बाद उन्होंने इसी मंच पर अपनी पहली आधिकारिक भागीदारी की थी. पिछले वर्ष आयोजित इस कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए इसे हर वर्ष आयोजित करने का निर्णय लिया गया.
उन्होंने कहा कि यह मंच India और जर्मनी के नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और विशेषज्ञों को एक साथ लाता है, जहां दोनों देश नए विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, साझेदारी को मजबूत बनाते हैं और सहयोग के नए अवसर तलाशते हैं.
मीडिया से बातचीत में जान नोएथर ने बताया कि दो दिन पहले Bengaluru में आयोजित स्टार्टअप प्रतियोगिता में करीब 90 स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया, जहां कई नवोन्मेषी तकनीकी समाधान सामने आए.
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जर्मनी के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम का प्रमुख फोकस बन चुका है. India और जर्मनी के बीच सहयोग विशेष रूप से रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर केंद्रित है. उनका मानना है कि यदि दोनों देशों के उद्योग और शोध संस्थान मिलकर नई तकनीकों पर काम करें, तो उनके प्रोजेक्ट और उनके परिणाम वैश्विक स्तर पर मिसाल बन सकते हैं.
जान नोएथर ने कहा, “स्टार्टअप्स को इस क्षेत्र में सक्रिय होने का आह्वान किया गया था. मैं आपको बताना चाहता हूं कि दो दिन पहले ही हमने Bengaluru में एक स्टार्टअप प्रतियोगिता आयोजित की थी, जिसमें 90 प्रतिभागियों ने भाग लिया. प्रतियोगिता में कई शानदार और बेहद नवीन उत्पाद प्रदर्शित किए गए. विजेताओं को सियोल में होने वाले अगले एशिया-प्रशांत सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे सीमेंस, बायर, बीएएसएफ और अन्य प्रमुख निगमों के सीईओ सहित जर्मन उद्योग जगत के नेताओं के सामने अपने उत्पादों और परियोजनाओं को प्रस्तुत करेंगे. इससे आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी.”
जान नोएथर ने आगे कहा कि जर्मनी में ग्रीन हाइड्रोजन की मांग तेजी से बढ़ रही है. वर्तमान में जर्मनी अपनी लगभग आधी बिजली का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से करता है और अब वह ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर को और विस्तार देना चाहता है.
उन्होंने कहा कि इस दिशा में India एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभर रहा है. India प्रतिस्पर्धी लागत पर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की क्षमता रखता है और यही कारण है कि जर्मन कंपनियां India के साथ इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने की इच्छुक हैं.
इसके अलावा, एलएंडटी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. संदीप कुमार ने न्यूज एजेंसी से एक बातचीत में कहा कि आज के दौर में सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुका है.
उन्होंने ‘एडवांसिंग आत्मनिर्भरता कॉन्फ्रेंस ऑन डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग’ में कहा कि India के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. इससे देश न केवल तकनीकी रूप से मजबूत होगा, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा.
–
डीबीपी