बांग्लादेश में बढ़ते बाल श्रम से शोषण और काम की जगह पर दुर्व्यवहार को लेकर बढ़ी चिंता

ढाका, 20 जुलाई . बांग्लादेश में बच्चों के शोषण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच Governmentी हेल्पलाइन डेटा ने बड़ा खुलासा किया है. डेटा से पता चला है कि Government की चाइल्ड सपोर्ट सर्विस 1098 को जनवरी से 10 जून तक शोषण से जुड़े 101 कॉल आए, जबकि इमरजेंसी हेल्पलाइन 999 पर मई तक काम की जगह पर बच्चों के शोषण की 33 शिकायतें दर्ज हुईं.

ढाका के एक्शन फॉर सोशल डेवलपमेंट (एएसडी) के ‘ढाका शहर में घरेलू काम करने वाले बच्चों की स्थिति’ नाम के एक सर्वे का जिक्र करते हुए, बांग्लादेशी अखबार, द डेली इत्तेफाक, ने बताया कि राजधानी में घरेलू काम में लगे लगभग 50 फीसदी बच्चों को अलग-अलग तरह के शोषण का सामना करना पड़ता है, जबकि 31.45 फीसदी बच्चों पर बहुत ज्यादा काम का बोझ होता है.

बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘शिशुराय ​​सब’ की कन्वीनर लैला खांडाकर ने कहा कि होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्टेशन, ईंट भट्टों और अलग-अलग अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले बच्चों को हर दिन लंबे समय तक काम करना पड़ता है, उनके साथ मारपीट, बेइज्जती, गंदे काम करने के हालात, कम सैलरी और कई मामलों में तो सैलरी भी नहीं मिलती.

खांडाकर ने कहा कि बाल मजदूरी की मांग इसलिए ज्यादा है क्योंकि बच्चों को कमजोर, आसानी से काबू में किया जा सकने वाला और गलत काम का विरोध करने वाला नहीं माना जाता.

डेली इत्तेफाक ने उनके हवाले से कहा, “हमारे पास संस्थागत क्षेत्र में मॉनिटरिंग की ज्यादा गुंजाइश नहीं है. और अनौपचारिक क्षेत्र में ज्यादातर काम बच्चे करते हैं. इसलिए वे काम वाली जगहों पर गालीगलौज और शोषण के शिकार होते हैं और इसका कोई इलाज नहीं है.”

डोमेस्टिक वर्कर्स नेशनल फोरम बांग्लादेश की प्रेसिडेंट जकिया सुल्ताना ने कहा कि उन्होंने आठ साल की उम्र में डोमेस्टिक वर्कर के तौर पर काम करना शुरू किया था और उन्हें कई तरह के शोषण का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि दशकों बाद भी, ज्यादा कुछ नहीं बदला है, क्योंकि गरीब परिवारों के आठ साल के बच्चे भी घरों में काम करते समय इसी तरह के शोषण का सामना करते हैं.

घरेलू काम करने वाले बच्चों के साथ गलत व्यवहार के कई मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि ये घटनाएं मीडिया में आई हैं और इन पर चर्चा हुई है. लेकिन हम यह जानते हुए भी कि घरेलू काम करने वाले बच्चे काम पर आने पर लगातार कई तरह के गलत व्यवहार, जिसमें यौन शोषण भी शामिल है, का शिकार होते हैं, हम उन्हें रोक नहीं सकते.”

स्थानीय मीडिया ने बताया कि पिछले छह सालों में बांग्लादेश में बाल मजदूरी में तेजी से बढ़ोतरी हुई और मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे (एमआईसीएस) 2025 के मुताबिक, 2019 से अब तक लगभग 1.2 मिलियन और बच्चे वर्कफोर्स में शामिल हुए हैं.

रिपोर्ट से पता चला है कि 5 से 17 साल की उम्र के 9.2 फीसदी बच्चे अभी बाल मजदूरी में शामिल हैं, जो 2019 के 6.8 फीसदी से ज्यादा है.

यह बढ़ोतरी बांग्लादेश के बाल मजदूरी खत्म करने के वादे के बावजूद हुई, और यह 12 जून को मनाए गए विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के साथ हुई. बांग्लादेशी अखबार ‘ढाका ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, नतीजों से पता चलता है कि आर्थिक दिक्कतों की वजह से बच्चे पढ़ाई छोड़कर वर्कफोर्स में आ रहे हैं.

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केके/पीएम

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