
New Delhi, 7 जुलाई . उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान मारे गए खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की एक अदालत ने अपना फैसला 13 जुलाई तक के लिए टाल दिया है.
कड़कड़डूमा कोर्ट को Tuesday को इस मामले में फैसला सुनाना था, लेकिन अब अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपियों से जुड़े इस मामले की सुनवाई 13 जुलाई के लिए निर्धारित की है.
यह मामला वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है. 26 फरवरी 2020 को उनका शव खजूरी खास इलाके में एक नाले से बरामद किया गया था.
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ताहिर हुसैन और अन्य आरोपी गैरकानूनी जमावड़े तथा आपराधिक साजिश का हिस्सा थे, जिसके चलते दंगों के दौरान अंकित शर्मा की हत्या की गई.
मार्च 2023 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे. अदालत ने माना था कि आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा), 153ए (विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए.
ताहिर हुसैन पर आईपीसी की धारा 505, 109 और 114 के तहत भी आरोप तय किए गए थे.
आरोप तय करते समय ट्रायल कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ताहिर हुसैन ने कथित तौर पर भीड़ को हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए उकसाया और उन्हें “किसी को न छोड़ने” के लिए कहा.
अभियोजन के अनुसार, इस मामले में 26 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
शिकायत में कहा गया था कि 25 फरवरी को अंकित शर्मा घर का सामान खरीदने के लिए निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे. बाद में स्थानीय लोगों से जानकारी मिली कि चांदबाग इलाके से एक युवक को खजूरी खास के नाले में फेंक दिया गया है. इसके बाद नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद हुआ.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे की हत्या के लिए ताहिर हुसैन और उसके सहयोगी जिम्मेदार हैं.
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डीएससी