
जकार्ता, 8 जुलाई . India और इंडोनेशिया ने Tuesday को समुद्री सुरक्षा, रक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल भुगतान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए. इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, Prime Minister Narendra Modi और इंडोनेशिया के President प्रबोवो सुबियांतो ने इस बात पर जोर दिया कि India और इंडोनेशिया समुद्री पड़ोसी होने के साथ-साथ रणनीतिक साझेदार भी हैं. दोनों नेताओं ने रक्षा और समुद्री सहयोग को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई.
इसके साथ ही, दोनों देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग समझौते के जरिए रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का स्वागत किया.
समुद्री क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (एमडीए), समुद्री संपर्क, तटीय निगरानी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर), प्रदूषण नियंत्रण और खोज एवं बचाव (एसएआर) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. दोनों नेताओं का मानना है कि यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करेगा.
बयान में कहा गया है कि India और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा एवं सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) के नवीनीकरण और इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा एजेंसी बाकामला आरआई तथा भारतीय तटरक्षक बल के बीच कार्यान्वयन व्यवस्था का भी स्वागत किया.
दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों के बीच संयुक्त उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण, तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण, जहाज निर्माण, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, रखरखाव एवं मरम्मत (एमआरओ) सुविधाओं की स्थापना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) और रक्षा आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर भी सहमति जताई.
इसके अलावा, दोनों नेताओं ने सैन्य चिकित्सा संस्थानों के बीच दवाइयों की आपूर्ति को लेकर हो रही प्रगति का भी स्वागत किया.
दोनों नेताओं ने माना कि India के ‘विकसित India 2047’ और इंडोनेशिया के ‘इंडोनेशिया एमास 2045’ विजन के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाएं हैं.
इसी दिशा में उन्होंने आसियान-India व्यापार समझौते (एआईटीआईजीए) की समीक्षा को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापारिक वातावरण तैयार हो सके. इसके बाद दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे.
दोनों पक्षों ने 2026 में वर्किंग ग्रुप ऑन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट (डब्ल्यूजीटीआई) की दूसरी बैठक, बाइएनियल ट्रेड मिनिस्टर्स फोरम (बीटीएमएफ) की चौथी बैठक और जॉइंट इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल डायलॉग (ईएफडी) की पहली बैठक आयोजित करने पर भी सहमति व्यक्त की.
India और इंडोनेशिया ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया. दोनों देशों का लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए विविध और सुरक्षित सप्लाई चेन विकसित करना है.
इसी दिशा में दोनों देशों ने खनिज और स्टील सप्लाई चेन तकनीक के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए.
दोनों नेताओं ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और बैंक इंडोनेशिया के बीच स्थानीय मुद्रा में लेनदेन (लोकल करेंसी ट्रांजैक्शन-एलसीटी) संबंधी दिशा-निर्देशों को जल्द लागू करने की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा वित्तीय सहयोग और मजबूत होगा.
इसके साथ ही दोनों नेताओं ने India और इंडोनेशिया के बीच क्रॉस-बॉर्डर क्यूआर पेमेंट लिंक लागू करने की दिशा में हुई प्रगति का भी स्वागत किया. इससे दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान और आसान हो सकेगा.
डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में India के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) मॉडल को इंडोनेशिया में अपनाते हुए इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (आईओएन) शुरू करने का भी स्वागत किया गया. इसका उद्देश्य इंडोनेशिया के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ाना है.
India और इंडोनेशिया ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने, स्वास्थ्य कर्मियों के कौशल विकास संबंधी कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर करने तथा खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई.
दोनों देशों ने समुद्री और हवाई संपर्क को और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया. President प्रबोवो सुबियांतो ने सबांग बंदरगाह के एकीकृत विकास में India की रुचि का स्वागत किया.
इन समझौतों के जरिए India और इंडोनेशिया ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों देश आने वाले वर्षों में रक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए मिलकर काम करेंगे.
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डीबीपी