
New Delhi, 17 अप्रैल . Friday को Lok Sabha में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न हो पाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने ‘एक ऐतिहासिक क्षण का अवसर गंवा दिया है.’
रिजिजू की यह प्रतिक्रिया तब आई जब बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जिससे यह संवैधानिक संशोधनों के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार करने में नाकाम रहा.
उन्होंने कहा, “ये नतीजे एक ऐसे ऐतिहासिक और अहम बिल पर आए हैं, जिसका मकसद देश की महिलाओं को सम्मान और अधिकार देना था. विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. यह ऐतिहासिक पल एक ऐसा मौका था जिसे आप (विपक्ष) ने गंवा दिया.”
रिजिजू ने तीन विवादित बिलों पर लंबी बहस के बाद सदन को संबोधित किया; इन बिलों में परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ाने वाला संशोधन शामिल था.
उन्होंने कहा, “संविधान (131वां संशोधन) बिल के अलावा, हमारे पास दो और बिल हैं, यानी केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 और परिसीमन बिल, 2026; ये बिल संविधान (131वां संशोधन) बिल से गहरे तौर पर जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता. Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में, हम महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने का अपना अभियान जारी रखेंगे.”
हालांकि, Union Minister ने इस बात की पुष्टि की कि Government बाकी बचे दो बिलों पर आगे नहीं बढ़ेगी.
गौरतलब है कि इस बिल में Lok Sabha की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था; यह कदम लंबे समय से अटके हुए परिसीमन अभ्यास से जुड़ा था, जिसके तहत जनसंख्या में बदलाव के आधार पर चुनावी सीमाओं को फिर से तय किया जाना था.
इसके साथ ही, इसका मकसद Lok Sabha और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करना था, एक ऐसा सुधार जिसका वादा तो किया गया था, लेकिन जिसे अगले परिसीमन के बाद तक के लिए टाल दिया गया था.
Government का तर्क था कि मतदाताओं और प्रतिनिधियों के बीच के असंतुलन को ठीक करने के लिए सीटों का विस्तार और पुनर्वितरण जरूरी है; यह अंतर तब से और बढ़ गया है जब पिछले परिसीमन के दौरान 1971 की जनगणना के आधार पर सीमाओं को स्थिर कर दिया गया था.
हालांकि, विपक्षी दलों ने पलटवार करते हुए कहा कि Government महिला सशक्तिकरण के वादे की आड़ में एक ऐसी Political चाल चल रही है, जिससे ज्यादा जनसंख्या वृद्धि वाले उत्तरी राज्यों को तो फ़ायदा होगा, लेकिन दक्षिणी राज्यों को नुकसान उठाना पड़ेगा, वे दक्षिणी राज्य जिन्होंने अपनी जनसंख्या को स्थिर रखने में कामयाबी हासिल की है.
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एससीएच