
नवी Mumbai , 1 मार्च . नवी Mumbai में ‘हिंद दी चादर’ के अंतर्गत गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादी समागम का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम को Prime Minister Narendra Modi ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित रहे, और उन्होंने सभा को प्रत्यक्ष रूप से संबोधित किया.
Prime Minister Narendra Modi ने अपने संदेश में गुरु तेग बहादुर के अद्वितीय और सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए कहा कि गुरुजी ने मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया. उन्होंने कहा कि India का इतिहास शौर्य, समन्वय और सहयोग का इतिहास रहा है. जब-जब गुरुओं ने त्याग की पराकाष्ठा दिखाई, तब-तब देशवासियों ने उससे प्रेरणा ली. उन्होंने कहा कि आज जब देश को सामाजिक एकता की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब इस प्रकार के आयोजन यह विश्वास दिलाते हैं कि हमारे गुरुओं का आशीर्वाद सदैव हमारे साथ है. इस आयोजन के माध्यम से गुरुओं के पराक्रमी और प्रेरणादायी इतिहास को जन-जन तक पहुंचाया गया है.
Prime Minister मोदी ने कहा कि केंद्र Government गुरु साहिबों से जुड़े महत्वपूर्ण पर्वों को राष्ट्रीय स्तर पर मना रही है. उन्होंने बताया कि साहबजादों के सम्मान में वीर बाल दिवस मनाने की शुरुआत की गई, वहीं करतारपुर कॉरिडोर को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया. इसके साथ ही सिख संस्थाओं को एफसीआरए के तहत राहत देने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.
Prime Minister ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि उनकी Government ने 1984 के दंगों से जुड़े मामलों को फिर से खोलने का कार्य किया, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया, दंगा पीड़ितों के लिए अतिरिक्त मुआवजे की घोषणा की गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई. उन्होंने बताया कि अफगान सिखों को भारतीय नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त किया गया और ब्लैकलिस्ट में शामिल हजारों सिखों के नाम सूची से हटाए गए.
उन्होंने कहा कि सिख समाज की आस्था और सम्मान की रक्षा करना Government की जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा कि साहस और सत्य के साथ खड़े होने का भाव आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना गुरु साहिब के समय में था. उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है.
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि Prime Minister Narendra Modi ने राष्ट्रीय स्तर पर सिख गुरुओं के सम्मान और सेवा का कोई अवसर नहीं छोड़ा. अमित शाह ने कहा कि देशभर से आए श्रद्धालु आज से 350 वर्ष पूर्व दी गई गुरुजी की शहादत को नमन करने के लिए एकत्रित हुए थे.
उन्होंने कहा कि यदि गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान नहीं दिया होता तो आज दुनिया में हिंदू और सिख धर्म सुरक्षित नहीं रह पाते. उन्होंने कहा कि मुगल शासक औरंगजेब के अत्याचारों के खिलाफ गुरुओं ने समाज को एकजुट किया और समाज, संस्कृति तथा धर्म की रक्षा की.
गृह मंत्री ने कहा कि दसों सिख गुरुओं द्वारा स्थापित परंपराएं आज भी पूरे समाज के लिए अनुकरणीय हैं. उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हाल के दिनों में पंजाब में धर्म परिवर्तन की घटनाओं की खबरें सामने आ रही थीं, जो उचित नहीं हैं. अमित शाह ने कहा कि यह सिख गुरुओं की शिक्षाओं और बलिदान का अपमान है और ऐसे प्रयासों को रोका जाना चाहिए.
अमित शाह ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि गुरुओं का त्याग और संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और देश को उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करनी है.
Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर साहेब ने देश के सनातन धर्म और हिंदुओं की आस्था की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. उन्होंने कहा कि गुरुजी की शहादत के कारण ही आज देशवासी अपनी धार्मिक आस्था और परंपराओं को सुरक्षित रख पाए हैं.
Chief Minister ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान की जानकारी देश की जनता, विशेषकर हिंदू भाई-बहनों तक पहुंचना आवश्यक है, ताकि उन्हें यह समझ में आए कि किस प्रकार गुरुजी के त्याग ने समाज को मजबूती दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरु तेग बहादुर जी को केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उनके बलिदान को पूरे राज्य में हर ‘नानक नाम’ समुदाय और समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाया जाएगा.
सीएम फडणवीस ने अपने भाषण में कहा कि जब मुगल शासक औरंगजेब के समय हिंदुओं पर अत्याचार और जबरन धर्मांतरण की घटनाएं शुरू हुईं, तब समाज को गुरु तेग बहादुर साहेब की याद आई. उस कठिन समय में गुरुजी ने लोगों को आश्वस्त किया कि वे उनकी रक्षा करेंगे. उन्होंने बताया कि औरंगजेब द्वारा गुरुजी पर अमानवीय अत्याचार किए गए, उन्हें प्रताड़ित किया गया, लेकिन गुरु तेग बहादुर साहेब ने धर्म त्यागने से इनकार कर दिया और अंततः उन्हें शहीद कर दिया गया.
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डीकेपी/