
जम्मू, 1 जुलाई . जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भारत-Pakistan के बीच बातचीत की पैरवी करने वालों की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा मजबूत करने की जारी कोशिशों के बीच इस मांग को अनुचित बताया.
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “इस देश की एक अजीब विडंबना है. जो विषय किसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, उसमें जबरदस्ती दखल देना, जगजाहिर है कि यह किस चीज की ओर संकेत करता है.”
उन्होंने कहा, “खासकर तब, जब फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और मीरवाइज उमर फारूक जैसे नेता इसमें शामिल हों, जिन्होंने हमेशा अलगाववाद का समर्थन किया और आतंकवाद को संरक्षण दिया है. ऐसे लोग Pakistan के साथ बातचीत की वकालत करें, तो यह बहुत ही अजीब और गंभीर मामला है.”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए सुनील शर्मा ने कहा, “इस ऑपरेशन में भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा गया. अपनी इस भूमि की रक्षा के लिए वीर जवानों ने जिस तरह प्रदर्शन किया, ऐसे वक्त में बातचीत की वकालत करना ये विवादित दिखाई पड़ता है.”
सुनील शर्मा ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था दृढ़ हो रही है. शांति, रोजगार और समृद्धि के लिए यहां का नौजवान अपेक्षा रख रहा है. इसमें और कैसे सुधार और विस्तार किए जाए, इसके बजाय Pakistan से बातचीत की वकालत करना बहुत ही गंभीर है. इसकी गंभीरता के साथ जांच करने की जरूरत है.
सुनील शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जो अपने आप को बड़े दिग्गज नेता मानते हैं, उन्होंने कभी नेपाल, भूटान, चीन और म्यांमार जैसे देशों के साथ India की बातचीत को लेकर वकालत नहीं की. ये बार-बार Pakistan के साथ बातचीत करने की वकालत करते हैं. उन्होंने कहा, “आप देखेंगे कि जब-जब India ने शांति के लिए प्रयास किए हैं, तब-तब Pakistan ने छुरा घोंपने का काम किया है.”
बता दें कि India और Pakistan के लगभग 117 लोगों ने Prime Minister Narendra Modi और पड़ोसी मुल्क के पीएम शहबाज शरीफ को संयुक्त रूप से पत्र लिखा है. इन नेताओं में India की ओर से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मणिशंकर अय्यर, मनोज झा और हुमायूं कबीर जैसे नेता शामिल हैं.
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डीसीएच/