
शिमला, 16 जून . Himachal Pradesh Government का कहना है कि वर्षों से लंबित किशाऊ बहु उद्देशीय बांध परियोजना को लेकर बड़ी सफलता मिली है. Chief Minister सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में New Delhi में हुई उच्चस्तरीय बैठक में परियोजना से जुड़े आठ वर्ष पुराने वित्तीय विवाद का समाधान निकल आया है, जिससे 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है.
Chief Minister ने कहा कि लगभग 15,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना टौंस नदी पर Himachal Pradesh और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित है. लंबे समय से परियोजना के वित्तीय ढांचे और लागत वहन को लेकर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके कारण इसका कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा था.
New Delhi में आयोजित बैठक में सुखविंदर सिंह सुक्खू ने Himachal Pradesh के हितों की मजबूती से पैरवी करते हुए राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न डालने की मांग रखी. बैठक में India Government ने सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई कि परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्य दिल्ली, Rajasthan और Haryana, Himachal Pradesh के हिस्से के विद्युत घटक पर आने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वहन करेंगे.
Chief Minister ने कहा कि इससे प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम होगा. उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती Government ने परियोजना में राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपए देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान Government ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया.
उन्होंने कहा कि जब परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र Government 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करा रही है, तो विद्युत घटक के लिए भी इसी प्रकार की सहायता मिलनी चाहिए थी. राज्य Government ने इसी मुद्दे को मजबूती से उठाया और उसे सफलता मिली.
Chief Minister ने कहा कि परियोजना से सबसे अधिक विस्थापन और भौगोलिक प्रभाव Himachal Pradesh पर पड़ेगा. ऐसे में राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं था. उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में Himachal Pradesh के योगदान को देखते हुए राज्य को उचित प्रतिपूर्ति मिलनी चाहिए.
उन्होंने बताया कि परियोजना के पूरा होने के बाद Himachal Pradesh को विद्युत घटक के रूप में प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी. इसकी अनुमानित कीमत लगभग 600 करोड़ रुपए सालाना होगी, जिससे राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
Chief Minister ने कहा कि उनकी Government ने हमेशा प्रदेश और प्रदेशवासियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. उन्होंने इस निर्णय को बिजली परियोजनाओं में हिमाचल के अधिकारों, लंबित वित्तीय दावों और राज्य हितों की लड़ाई में बड़ी जीत बताया.
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एएमटी/वीसी