
रांची, 19 मार्च . Jharkhand हाई कोर्ट ने बोकारो की एक 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी के मामले में Police की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गुमशुदा युवती की मां की ओर से दाखिल हेवियस कॉर्पस याचिका पर Thursday को सुनवाई करते हुए जांच की रफ्तार और Police की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए बोकारो एसपी से पूछा कि आखिर इस मामले को सीबीआई को क्यों न सौंप दिया जाए.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह के मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती. खंडपीठ ने बोकारो एसपी की ओर से जांच में हो रही देरी और ठोस प्रगति के अभाव पर नाराजगी जताई. प्रार्थी के अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की ने अदालत को बताया कि युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है और इस संबंध में बोकारो के पिंडराजोरा थाना में कांड संख्या 147/2025 दर्ज है.
जांच के दौरान 11 दिसंबर 2025 को परिजनों के मोबाइल पर एक कॉल आई थी, जिसमें युवती के पुणे में होने की जानकारी दी गई थी. Police ने फोन करने वाले युवक को दबोचा भी था, जिसने पूछताछ में बताया कि युवती पुणे में उसके दोस्त के पास है.
हैरानी की बात यह है कि जब Police टीम उस युवक को लेकर ट्रेन से पुणे जा रही थी, तब वह Police को चकमा देकर फरार हो गया, और Police अब तक खाली हाथ है. सुनवाई के दौरान वर्चुअल रूप से उपस्थित बोकारो एसपी ने अदालत को बताया कि युवती की तलाश में पुणे और आसपास के इलाकों में छापेमारी की गई है. Police ने एक अन्य संदिग्ध को भी पकड़ा है, जिसका सुराग पाने के लिए नार्को टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही है.
हालांकि, खंडपीठ इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आई. कोर्ट ने वर्ष 2020 के एक पुराने मामले का हवाला देते हुए याद दिलाया कि कैसे बोकारो में ही एक युवती की गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज हुई थी और साल भर बाद पता चला कि उसकी हत्या हो चुकी है. कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को देखते हुए Police को अधिक संवेदनशीलता और तेजी दिखाने की जरूरत है.
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एसएनसी/डीकेपी