
गुवाहाटी, 21 अप्रैल . गुवाहाटी हाई कोर्ट ने Tuesday को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की जमानत अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. यह मामला असम Police ने दर्ज किया था. सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने तीखे और एक-दूसरे से बिल्कुल अलग तर्क पेश किए.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने वकील कमल नारायण चौधरी के साथ मिलकर दलील दी कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और बदले की भावना से किया गया है.
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं है और इनका मकसद एक Political विरोधी की आवाज दबाना है.
इस अर्जी का विरोध करते हुए, असम Police की तरफ से पेश हुए असम के एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने कहा कि खेड़ा गंभीर अपराधों में शामिल हैं, जिनमें जालसाजी और धोखाधड़ी शामिल है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच में पहली नजर में ऐसे सबूत मिले हैं, जो जानबूझकर की गई गलत हरकतों की ओर इशारा करते हैं. इसलिए, हिरासत में पूछताछ और जमानत न देना सही है.
प्रदेश Government ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा पवन खेड़ा को दी गई राहत के खिलाफ Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है. यह मामला Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी, रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है.
खेड़ा ने पहले आरोप लगाया था कि रिंकी भुइयां सरमा का व्योमिंग स्थित एक अमेरिकी कंपनी से संबंध है. उन्होंने Chief Minister सरमा और उनके परिवार से जुड़ी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का दावा किया था. इन आरोपों में बड़ी रकम और कई पासपोर्ट होने के दावे शामिल हैं, जिन्हें असम के Chief Minister ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
तेलंगाना हाई कोर्ट ने 10 अप्रैल को खेड़ा को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देते हुए कहा था कि उनकी गिरफ्तारी की आशंका सही लगती है. हालांकि, कोर्ट ने कुछ शर्तें भी रखीं, जिनमें जांच में सहयोग करना, बिना अनुमति के विदेश यात्रा न करना, और ऐसे बयान न देना शामिल है जिनसे जांच पर बुरा असर पड़ सकता हो.
इसके बाद, असम Government ने इस राहत को रद्द करवाने के लिए Supreme Court में अर्जी दी. इस मामले पर सुनवाई इसी हफ्ते बाद में होने की संभावना है.
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एएसएच/एबीएम