झारखंड नियुक्ति घोटाले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर Supreme Court में 24 अगस्त को सुनवाई

रांची, 21 अगस्त . Jharkhand में जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से हुई नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग को लेकर दायर याचिका पर Supreme Court 24 अगस्त को सुनवाई करेगा.

याचिका हरिशरण देवगन की ओर से दायर की गई है. याचिका पर Supreme Court केमुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ सुनवाई करेगी. याचिका में Jharkhand लोक सेवा आयोग (जेपीएससी), Jharkhand कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी), सीबीआई और Jharkhand अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) को प्रतिवादी बनाया गया है.

याचिकाकर्ता ने जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से पिछले वर्षों में हुई विभिन्न नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की व्यापक जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि दोनों भर्ती संस्थाओं के माध्यम से आयोजित कई परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता के मामले सामने आए हैं. ऐसे में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए मामले की जांच राज्य की एजेंसी के बजाय केंद्रीय जांच एजेंसी से कराया जाना जरूरी है.

याचिका में राज्य में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया, परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों की भूमिका और नियुक्तियों के दौरान कथित अनियमितताओं की भी जांच कराने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, निजी एजेंसियों तथा अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए.

यह मामला ऐसे समय में Supreme Court पहुंचा है, जब राज्य Government ने सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की है. राज्य Government ने 18 अगस्त को जारी अधिसूचनाओं के माध्यम से 22 भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द कर दिया था.

इसके अलावा छह भर्ती प्रक्रियाओं को स्थगित किया गया, जबकि 17 अन्य भर्ती प्रक्रियाओं को जांच के दायरे में शामिल किया गया है. Government की इस कार्रवाई के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने Jharkhand हाईकोर्ट का रुख किया है.

हाईकोर्ट ने कुछ मामलों में Government के रद्दीकरण आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई है. अदालत ने संबंधित मामलों में Government से जांच की स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है.

एसएनसी/एमएस

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