भगवंत मान की पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर हमलावर हुईं हरसिमरत कौर, बोलीं- ‘5 सितंबर को फिर पूछूंगी’

चंडीगढ़, 22 अगस्त . पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के Chief Minister भगवंत मान की पत्नी पर 5 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दखल के बाद राजनीति भी तेज हो गई है. इसी कड़ी में शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने आम आदमी पार्टी और Chief Minister भगवंत मान पर निशाना साधा.

हरसिमरत कौर बादल ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “Chief Minister भगवंत मान की पत्नी पर 5 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के आरोप इतने गंभीर हैं कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इसमें दखल देना पड़ा.”

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी की ओर से ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ देखने का बेसब्री से इंतजार है. समय-सीमा 2 हफ्ते की है! इस ट्वीट को सेव कर लें. पंजाब ‘आप’ से मैं 5 सितंबर को फिर पूछूंगी.”

इससे पहले एनएचआरसी ने पंजाब के Chief Minister भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर के खिलाफ आरोपों पर संज्ञान लिया. आयोग ने राज्य के अधिकारियों को मामले की जांच करने और कार्रवाई पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया.

एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की बेंच ने ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ की धारा 12 के तहत इस मामले पर संज्ञान लिया. रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह पंजाब Government (चंडीगढ़) के मुख्य सचिव और पंजाब के डीजीपी को नोटिस जारी करे. उन्हें निर्देश दिया जाए कि वे शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करवाएं और आयोग के अवलोकन के लिए दो सप्ताह के भीतर ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ सौंपें.

आयोग ने शिकायतकर्ता के हवाले से नोटिस में कहा, “एक रिटायर्ड जज ने सार्वजनिक रूप से कहा कि रेप के एक मामले में 5 करोड़ रुपए की मांग की गई थी, जिसमें कथित तौर पर पंजाब के Chief Minister की पत्नी शामिल थीं. ‘लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी’ की ओर से दायर इस शिकायत में चिंता जताई गई कि इस तरह का दखल पीड़ित के सम्मान, सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और न्याय पाने के अधिकार को प्रभावित कर सकता है. इसमें आरोपों की स्वतंत्र जांच, सबूतों को सुरक्षित रखने और जांच को कमजोर या प्रभावित करने की किसी भी कोशिश की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है.”

इसमें कहा गया, “शिकायतकर्ता ने इस बात को उठाया है कि रेप पीड़िता के न्याय पाने का अधिकार किसी भी प्रभाव, रुतबे या पद से ऊपर होना चाहिए. शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ित के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं.

डीसीएच/

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