राजस्थान: जाट आरक्षण को लेकर भरतपुर में ‘हुंकार सभा’, हनुमान बेनीवाल होंगे शामिल

jaipur, 22 जून . जाट समुदाय की ओर से केंद्रीय ओबीसी आरक्षण की लंबे समय से चली आ रही मांग ने पूर्वी Rajasthan में एक बार फिर जोर पकड़ लिया है. भरतपुर में Monday को एक विशाल ‘हुंकार सभा’ ​​आयोजित की जाएगी.

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल अपने समर्थकों के साथ ‘हुंकार सभा’ में शामिल होंग. उन्होंने कहा कि भरतपुर के नुमाइश मैदान में ‘जाट आरक्षण हुंकार रैली’ आयोजित की जाएगी.

उन्होंने आगे कहा, “यह रैली धौलपुर, भरतपुर और डीग जिलों में जाट समुदाय के लिए केंद्र स्तर पर ओबीसी आरक्षण की मांग करने के लिए आयोजित की जा रही है.”

नुमाइश मैदान में जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से आयोजित इस रैली में Rajasthan के साथ-साथ Haryana, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में जाट समुदाय के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. आयोजकों का दावा है कि इस सभा में लगभग एक लाख लोग शामिल हो सकते हैं.

समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार के अनुसार, कार्यक्रम के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिसमें एक बड़ा डोम (मंडप), पीने के पानी की सुविधा, चिकित्सा सहायता और एम्बुलेंस सेवाएं शामिल हैं. उन्होंने बताया कि समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए Rajasthan , Haryana, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के गांवों में पारंपरिक तरीके से ‘पीले चावल’ बांटकर लोगों को आमंत्रित किया गया.

बता दें कि भरतपुर, धौलपुर और डीग क्षेत्रों में जाटों के लिए केंद्रीय आरक्षण की मांग वर्षों से एक विवादित मुद्दा रहा है. समुदाय के नेताओं का कहना है कि अलग-अलग Governmentों से बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद, यह मांग अभी तक पूरी नहीं की गई.

फौजदार ने कहा कि समुदाय केंद्र स्तर पर आरक्षण के लाभ के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा है और अब अपने आंदोलन को तेज करने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने कहा कि भरतपुर की यह सभा न केवल समुदाय की चिंताओं को उठाने का मंच बनेगी, बल्कि आरक्षण आंदोलन की भविष्य की रणनीति भी तय करेगी.

‘हुंकार सभा’ में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम भी बढ़ा दिए हैं. इस रैली को जाट समुदाय की ओर से ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है और यह आने वाले महीनों में इस क्षेत्र में आरक्षण आंदोलन की दिशा तय कर सकती है.

एसडी/पीएम

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