गुजरात: सूरत में 1.07 करोड़ रुपए के एम्बरग्रीस के साथ यूपी के तीन युवक गिरफ्तार

सूरत, 20 अप्रैल . सूरत के डिंडोली इलाके के तीन लोगों को Monday को गिरफ्तार किया गया. Police ने उनके पास से 1.071 किलोग्राम एम्बरग्रीस बरामद किया, जो स्पर्म व्हेल की आंतों में बनने वाला एक दुर्लभ और मोम जैसा पदार्थ होता है.

जब किए गए अवैध पदार्थ की कीमत करीब 1.07 करोड़ रुपए बताई गई है, जिसे शहर में छापेमारी के दौरान बरामद किया गया.

गिरफ्तार किए गए तीन लोगों की पहचान अंबरीश मिश्रा (34) के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का रहने वाला है और डिलीवरी एग्जीक्यूटिव का काम करता है. दूसरे आरोपी सोनू उर्फ बबलू उपाध्याय (40) और तीसरे संदीप उपाध्याय (35) हैं. ये दोनों भी जौनपुर के ही रहने वाले रिक्शा चालक हैं. फिलहाल, तीनों सूरत में रह रहे थे.

एम्बरग्रीस उनके पास एक सफेद और लाल रंग के डिजाइन वाले प्लास्टिक बैग में मिला.

डीसीपी एसओजी (स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप) राजदीपसिंह नकुम ने बताया कि इन लोगों को यह एम्बरग्रीस करीब तीन महीने पहले भरूच समुद्र तट के पास धीरू वाघेला और उमेश पलिया ने दिया था.

उन्होंने कहा, ”पिछले एक हफ्ते से ये लोग इसे बेचने और ग्राहक तलाशने के लिए घूम रहे थे. इसी दौरान किसी को इसकी जानकारी मिली और उसने एसओजी को सूचना दे दी, जिसके बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.”

नकुम ने बताया कि मिश्रा फ्लिपकार्ट में डिलीवरी का काम करता है, जबकि सोनू और संदीप दोनों रिक्शा चालक हैं.

तीनों के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है.

नकुम ने यह भी कहा कि ये लोग सूरत को आर्थिक केंद्र मानकर यहां ग्राहक मिलने की उम्मीद से आए थे, लेकिन ऐसे ग्राहक मिलना संभव नहीं होता.

उन्होंने आगे कहा, ”कोई भी कॉस्मेटिक बनाने वाली कंपनी एम्बरग्रीस केवल अधिकृत और Governmentी मान्यता प्राप्त डीलरों से ही खरीदती है. कोई भी कंपनी इस तरह के अवैध स्रोतों से खरीदारी नहीं करती.”

उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर किसी को समुद्र किनारे एम्बरग्रीस मिले तो तुरंत वन विभाग या Police को सूचना दें. अगर किसी को एम्बरग्रीस मिलता है तो उसे हमेशा वन विभाग या Police से संपर्क कर Government के पास जमा कराना चाहिए.

एम्बरग्रीस एक मोम जैसा पदार्थ होता है, जिसमें शुरुआत में बदबू आती है, लेकिन बाद में इससे खुशबू आने लगती है.

इसे परफ्यूम उद्योग में सुगंध को लंबे समय तक टिकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इसकी कीमत के कारण इसे ‘तैरता हुआ सोना’ भी कहा जाता है.

India में इसका व्यापार अवैध है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दंडनीय अपराध है.

तीनों आरोपियों को आगे की जांच के लिए Gujarat वन विभाग के डुमस कार्यालय को सौंप दिया गया है.

एएमटी/डीकेपी

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