राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने महाराष्ट्र लोकायुक्त संस्था में चार नए सदस्यों को दिलाई पद की शपथ

Mumbai , 14 अगस्त . बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सुरेंद्र पंढरीनाथ तवाडे ने Maharashtra लोकायुक्त संस्था के न्यायिक सदस्य के तौर पर शपथ ली. Maharashtra के Governor जिष्णु देव वर्मा ने Friday को Mumbai के लोक भवन में आयोजित एक संक्षिप्त शपथ ग्रहण समारोह में जस्टिस तवाडे को पद की शपथ दिलाई.

रिटायर्ड चीफ डिस्ट्रिक्ट जज सुवर्णा किशोर केओले ने भी Maharashtra लोकायुक्त संस्था के न्यायिक सदस्य के तौर पर शपथ ली. रिटायर्ड एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ओम प्रकाश गुप्ता और Maharashtra की रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल ऑफ Police रश्मि शुक्ला ने भी Maharashtra लोकायुक्त संस्था के गैर-न्यायिक सदस्यों के तौर पर शपथ ली. ये नियुक्तियां गवर्नर ने नए लोकायुक्त एक्ट 2023 के तहत कीं. सभी सदस्यों की नियुक्ति 5 साल के कार्यकाल के लिए या 70 साल की उम्र पूरी होने तक (जो भी पहले हो) की गई है.

इस मौके पर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे, लोकायुक्त जस्टिस विद्यासागर कनाडे (रिटायर्ड), चीफ सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल और Government के सीनियर अधिकारी मौजूद थे. गवर्नर के सेक्रेटरी डॉ. प्रशांत नारनवरे ने लोकायुक्त संस्था के चार सदस्यों की नियुक्ति के वारंट पढ़कर सुनाए. शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत राष्ट्र गीत, राष्ट्रगान और Maharashtra गीत के गायन से हुई और समापन राष्ट्र गीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ.

इसके पहले 14 जुलाई को Maharashtra के लोकायुक्त जस्टिस वी.एम. कनाडे (सेवानिवृत्त) ने Governor जिष्णु देव वर्मा से मुलाकात कर वर्ष 2025 के लिए लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त के कामकाज की 53वीं संयुक्त वार्षिक रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट में वर्ष 2025 के दौरान कार्यालय में प्राप्त शिकायतों, उनके निपटारे और संस्था के कामकाज का विवरण दिया गया है.

लोकायुक्त कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 8,547 नई शिकायतें प्राप्त हुईं. इनमें से 3,869 शिकायतों को पंजीकृत नहीं किया गया, क्योंकि वे अन्य अधिकारियों को भेजे गए आवेदनों की प्रतियां थीं या उन पर शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर नहीं थे. इसके बाद कुल 4,678 शिकायतों को विधिवत दर्ज किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 की शुरुआत में पिछले वर्षों के 4,287 मामले पहले से लंबित थे. इस तरह पूरे वर्ष के दौरान लोकायुक्त कार्यालय के पास सुनवाई और निपटारे के लिए कुल 8,965 मामले थे. इनमें से 4,885 मामलों का निपटारा कर दिया गया, जबकि वर्ष के अंत तक 4,080 मामले लंबित रहे.

ओपी/वीसी

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