पश्चिम बंगाल में निर्बाध एसआईआर कराने के लिए राज्यपाल ने तृणमूल सरकार को दिए तीन सुझाव

कोलकाता, 12 दिसंबर . पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा नेताओं में जुबानी जंग जारी है. इस बीच Friday को राज्य के गवर्नर सी.वी. आनंद बोस ने तृणमूल Government को एसआईआर में रुकावटें हटाने और इस काम में लगे बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की सुरक्षा के लिए तीन सुझाव दिए हैं.

इसके साथ ही गवर्नर ने पश्चिम बंगाल Government को याद दिलाया कि Supreme Court के हालिया आदेशों के अनुसार, बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करना और एसआईआर के काम में रुकावटें हटाना राज्य Government की ड्यूटी है.

Friday दोपहर गवर्नर ऑफिस से जारी एक बयान में Supreme Court की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया गया, जिसमें चुनाव आयोग से इन मुद्दों पर ध्यान देने को कहा गया था. इसमें कहा गया था कि अराजकता की इजाजत नहीं दी जा सकती और अगर बीएलओ को धमकाया या रोका जाता है तो स्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा.

Supreme Court की टिप्पणी का हवाला देते हुए गवर्नर ने पश्चिम बंगाल Government से यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सिस्टम बनाने को कहा कि न तो बीएलओ को धमकाया जाए और न ही जरूरी एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट आए.

गवर्नर ने तीन सुझाव भी दिए. पहला सुझाव यह है कि चूंकि बीएलओ जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं, इसलिए जिला प्रशासन को गांवों, कस्बों और शहरों में बूथ स्तर पर उन्हें सुरक्षा देने का निर्देश दिया जा सकता है.

दूसरा सुझाव यह है कि राज्य Government Police को निर्देश दे सकती है कि वह बीएलओ के साथ उनके गिनती के काम में बूथ स्तर पर पर्याप्त संख्या में तैनात रहे.

तीसरा और अंतिम सुझाव यह है कि राज्य Government को बीएलओ को आवश्यक बुनियादी सुविधाएं देनी चाहिए ताकि वे अपना काम आसानी से कर सकें. पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कई शिकायतें आई हैं कि वह बीएलओ पर रूलिंग पार्टी की मर्जी के हिसाब से बेवजह दबाव डाल रही है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने तो जिला मजिस्ट्रेट और जिला चुनाव अधिकारी पर भी आरोप लगाया था कि वे रूलिंग तृणमूल कांग्रेस के कहने पर बीएलओ पर काम का दबाव बना रहे हैं.

एएमटी/वीसी

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