पंजाब विधानसभा में सरकार का विश्वास मत पास, भगवंत मान के ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट की मांग पर हंगामा

चंडीगढ़, 1 मई . पंजाब Government ने श्रमिक दिवस पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया. पंजाब में आम आदमी पार्टी के विधायकों के पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच सीएम भगवंत मान ने पंजाब Government का विश्वास मत पेश किया. इस मौके पर Chief Minister ने श्रमिकों को बड़ा तोहफा देते हुए न्यूनतम मजदूरी में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि यह फैसला Governmentी और निजी दोनों क्षेत्रों में लागू होगा.

विधानसभा में ध्वनि मत से विश्वास मत पास हुआ. इस दौरान भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल ने वॉकआउट कर दिया था, जिससे विश्वासमत सर्वसम्मति से पास हो गया है. ऐसे में अब भगवंत मान की Government को 6 महीने तक कोई खतरा नहीं है.

इस दौरान विधानसभा में बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी पूरी तरह मजबूत और एकजुट है. ‘आप का झाड़ू’ India की राजनीति की सफाई करता रहेगा.

इससे पहले विधानसभा में Chief Minister भगवंत मान ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मजदूरों के घरों और उनकी जिंदगी के हालात बदल सकती है. उन्होंने एक बार फिर शिक्षा के महत्व को दोहराते हुए कहा कि गरीब परिवारों के बच्चे परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि सही अवसर मिलने पर हर बच्चा आगे बढ़ सकता है. उन्होंने Governmentी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

पंजाब विधानसभा उस समय हंगामा हो गया, जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने Chief Minister भगवंत मान समेत सभी विधायकों का ब्रेथ एनालाइजर और डोप टेस्ट कराने की मांग उठाई. अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर बुलाए गए इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने Chief Minister भगवंत मान पर सदन में नशे की हालत में आने का आरोप लगाते हुए सभी विधायकों का बंद कमरे में अल्कोहल टेस्ट कराने की मांग की.

कांग्रेस का कहना था कि सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ सदस्यों के व्यवहार और शारीरिक स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं, इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए मेडिकल जांच जरूरी है.

वॉकआउट के बाद कांग्रेस के कई विधायक स्पीकर के दफ्तर पहुंच गए और सभी विधायकों का ‘अल्कोमीटर’ टेस्ट कराने की मांग पर अड़ गए, जिससे विधानसभा परिसर में तनाव और बढ़ गया.

सदन के भीतर तीखी नोकझोंक देखने को मिली. विपक्ष पर कार्यवाही में बाधा डालने और सदन की गरिमा कम करने के आरोप लगे. स्थिति संभालने के लिए स्पीकर को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा. हालांकि इसके विपक्षी दलों ने सदन विधानसभा परिसर में प्रदर्शन भी किया.

एएमटी/वीसी

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