शेखपुरा में पीएमईजीपी से बदली गौरी की किस्मत, सिलाई-हैंडीक्राफ्ट से 20 लोगों को दे रहीं रोजगार

शेखपुरा, 9 अगस्त . केंद्र Government की Prime Minister रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी पीएमईजीपी योजना ग्रामीण इलाकों में आजीविका का बड़ा सहारा बन रही है. शेखपुरा जिले की गौरी कुमारी और उनके पति ललन पांडे इसकी मिसाल हैं. पीएमईजीपी का लाभ लेकर दोनों ने न सिर्फ अपनी किस्मत बदली बल्कि गांव के 20 लोगों को रोजगार भी दिया.

गौरी कुमारी पेशे से महिला उद्यमी हैं. उन्होंने से बात करते हुए बताया कि पहले वे मार्केटिंग का काम करती थीं लेकिन उसमें आमदनी तय नहीं थी. उन्होंने कहा, “मैं मार्केटिंग करती थी, लेकिन उससे घर चलाना मुश्किल था. फिर पीएमईजीपी योजना के बारे में पता चला. मैंने तुरंत आवेदन किया और सिलाई मशीन व हैंडीक्राफ्ट मशीन लेकर काम शुरू किया.”

शुरुआत आसान नहीं थी. कच्चा माल, ग्राहक और पूंजी की दिक्कतें आईं लेकिन मेहनत से धीरे-धीरे काम बढ़ा. आज गौरी के पास ऑर्डर की कमी नहीं है और वे महीने में अच्छी कमाई कर रही हैं. उनके साथ अभी करीब 20 महिलाएं और पुरुष काम कर रहे हैं.

गौरी के पति ललन पांडे ने अपनी संघर्ष की कहानी साझा करते हुए कहा, “पहले मैं दिल्ली और गाजियाबाद में सिलाई मशीन चलाता था. 2020 में कोविड के दौरान सब बंद हो गया और हम गांव लौट आए. यहां भुखमरी जैसी स्थिति थी. उसी समय पीएमईजीपी की जानकारी मिली. पत्नी के नाम पर लोन लेकर हमने सिलाई और हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया. आज हम आत्मनिर्भर हैं.”

ललन ने कहा कि योजना की सबसे बड़ी ताकत सब्सिडी और आसान ऋण है, जिससे छोटे उद्यमी बिना डर के शुरुआत कर सकते हैं. बैंक और जिला उद्योग केंद्र के सहयोग से मशीनें आईं और काम खड़ा हुआ. गौरी कुमारी ने अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया, “अगर Government से और ऋण सहायता मिले तो हम 200 सिलाई मशीनें लगा सकते हैं. इससे करीब 200 लोगों को रोजगार मिलेगा. मैं Government और प्रशासन से मदद की मांग करती हूं.”

उनके यूनिट में काम करने वाली माधुरी देवी कहती हैं, “पहले घर में आमदनी नहीं थी. अब यहां सिलाई सीखकर महीने की तनख्वाह मिलती है. गौरी दीदी ने हमें हुनर भी सिखाया और काम भी दिया.”

गौरी और ललन दोनों ने Prime Minister मोदी का आभार जताया. उन्होंने कहा कि पीएमईजीपी जैसी योजनाएं गरीब और बेरोजगार परिवारों के लिए वरदान हैं. दोनों ने खासकर महिलाओं और युवाओं से अपील की कि वे Governmentी योजनाओं की जानकारी लें. उन्होंने कहा, “बैंक जाएं, डीआईसी से मिलें, ट्रेनिंग लें. खुद का काम शुरू करें. नौकरी के पीछे भागने से बेहतर है कि हम खुद 10 लोगों को रोजगार दें.”

जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि शेखपुरा में पीएमईजीपी के तहत पिछले सालों में कई इकाइयां लगी हैं. सिलाई, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और हैंडीक्राफ्ट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है.

एससीएच/पीएम

Leave a Comment