
New Delhi, 30 मई . ‘गजराज’ ने एक अहम मिशन को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाई है. दो देशों के संबंधों को और समृद्ध करने की जिम्मेदारी इसने निभाई. ‘गजराज’ भारतीय वायुसेना का प्रमुख भारी भरकम परिवहन विमान है और इसे आईएल-76एमडी नाम से भी जाना जाता है.
भारतीय वायुसेना के जनसंपर्क विभाग ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि वायुसेना का ये बड़ा विमान Saturday को भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेषों को दिल्ली से मंगोलिया ले जाने के मिशन में शामिल रहा. यह मिशन सांस्कृतिक कूटनीति और India की सभ्यतागत विरासत के वैश्विक प्रसार का प्रतीक माना जा रहा है.
बौद्ध धर्म में भगवान बुद्ध के अवशेषों को ज्ञान, करुणा और मोक्ष के प्रतीक के रूप में अत्यंत श्रद्धा से देखा जाता है. मंगोलिया में इन अवशेषों का प्रदर्शन दोनों देशों के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करता है.
India और मंगोलिया बौद्ध धर्म की साझा विरासत के माध्यम से ऐतिहासिक रूप से जुड़े हुए हैं, और यह मिशन उस सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रिश्ते को और गहराई प्रदान करता है.
आगे लिखा गया कि भारतीय वायुसेना के लिए यह केवल एक लॉजिस्टिक मिशन नहीं था, बल्कि आस्था, विरासत और अंतरराष्ट्रीय मित्रता को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्रयास था, जिसे गजराज के सहारे अंजाम दिया गया.
तस्वीरों में स्पष्ट दिख रहा है कि एयरपोर्ट पर पूरे विधि-विधान के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल के हाथों में सौंपा गया, जिसकी अगुवाई असम के Governor लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने की. इनमें महात्मा बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष हैं.
इन अवशेषों को मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में 9 जून तक प्रदर्शित किया जाएगा. यह प्रदर्शनी India Government के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है और इसे दोनों देशों की साझा बौद्ध विरासत को दर्शाने वाली एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और कूटनीतिक पहल माना जा रहा है.
ये अवशेष यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप से जुड़े हैं, जिसे बौद्ध धर्म के सबसे पूजनीय केंद्रों में से एक माना जाता है.
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केआर/