
New Delhi, 14 अगस्त . आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर तकनीक के तेजी से विकसित होते दौर में India अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, देश सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के हर महत्वपूर्ण हिस्से में क्षमता विकसित कर रहा है, जिसमें चिप डिजाइन, वेफर फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, उपकरण निर्माण और कच्ची सामग्री शामिल हैं. अब तक India में विभिन्न तकनीकी नोड्स पर सात चिप्स का सफल निर्माण किया जा चुका है, जिनमें 12 नैनोमीटर जैसे उन्नत नोड्स भी शामिल हैं.
Government के अनुसार, India ने छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें कुल निवेश प्रतिबद्धता 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक है. इन परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले निर्माण इकाइयां और एडवांस्ड पैकेजिंग सुविधाएं शामिल हैं. इनमें से तीन इकाइयों ने व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि India अब केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक विनिर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ चुका है.
फैक्टशीट के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक देश की 75 संस्थाओं द्वारा 211 चिप्स का टेप-आउट किया जा चुका है. यह उपलब्धि India की बढ़ती घरेलू डिजाइन क्षमता को दर्शाती है और बताती है कि देश अब वैश्विक चिप डिजाइन परिदृश्य में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है.
Government ने जुलाई 2026 में ‘सेमिकॉन 2.0’ कार्यक्रम को भी मंजूरी दी है, जिसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी), चिप डिजाइन और सिस्टम डिजाइन को प्रोत्साहन देना है. Government का मानना है कि इससे India एक वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन हब के रूप में और मजबूत होगा.
Governmentी बयान में कहा गया है कि सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं. स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, उपग्रह, रक्षा प्रणालियां और एआई-आधारित तकनीकें सभी उन्नत चिप्स पर निर्भर हैं. वहीं एआई के विस्तार के साथ हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, विशेष प्रोसेसर और उन्नत चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसी कारण सेमीकंडक्टर और एआई तकनीकें एक-दूसरे से गहराई से जुड़ती जा रही हैं.
इस बदलते तकनीकी परिदृश्य को देखते हुए India केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने पर भी जोर दे रहा है. इसी दिशा में Government की इंडियाएआई मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
करीब 10,372 करोड़ रुपए के परिव्यय वाली इंडियाएआई मिशन ने पिछले एक वर्ष में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है. जून 2026 तक इस मिशन के तहत उपलब्ध साझा कंप्यूटिंग क्षमता बढ़कर 45,000 से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) तक पहुंच गई है.
Governmentी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक 237 परियोजनाओं ने सब्सिडी वाली एआई कंप्यूटिंग सुविधा का उपयोग किया है. इन परियोजनाओं को कुल 93.18 लाख जीपीयू घंटे उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे देश के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं को एआई मॉडल विकसित करने, उन्हें प्रशिक्षित करने, परीक्षण करने और अनुसंधान गतिविधियां संचालित करने के लिए अपेक्षाकृत कम लागत पर उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग शक्ति प्राप्त हो रही है.
Government का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य भारतीय नवाचारकर्ताओं के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करना और देश में एआई अनुसंधान एवं विकास को गति देना है.
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डीबीपी