पचपदरा रिफाइनरी को लेकर सीएम भजनलाल के कथित दावे पर पूर्व सीएम गहलोत की प्रतिक्रिया

jaipur, 4 जुलाई . बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी को लेकर Rajasthan के Chief Minister भजनलाल शर्मा और पूर्व Chief Minister अशोक गहलोत के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली. इससे Political हलकों और social media पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

यह मामला उस वक्त सामने आया, जब Chief Minister भजनलाल शर्मा ने कथित तौर पर कहा कि पचपदरा रिफाइनरी की आधारशिला वर्ष 2018 में Prime Minister Narendra Modi ने रखी थी.

Chief Minister भजनलाल शर्मा के इस दावे का जवाब देते हुए पूर्व Chief Minister अशोक गहलोत ने इस बयान को तथ्यों के हिसाब से गलत और दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि राज्य के मुखिया को Rajasthan की एक बड़ी विकास परियोजना के इतिहास के बारे में जानकारी नहीं थी.

अशोक गहलोत ने social media पर वर्ष 2013 में हुई रिफाइनरी की असली आधारशिला रखने की रस्म की तस्वीरें शेयर कीं. उनके अनुसार, इस कार्यक्रम में तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली शामिल हुए थे.

उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें और आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाते हैं कि इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत कांग्रेस Government के दौरान हुई थी. उन्होंने भाजपा Government की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि 2013 में काम शुरू होने के बाद Government बदलने के कारण यह परियोजना लगभग पांच साल तक रुकी रही.

गहलोत के अनुसार, इस देरी के कारण परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 37,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपए हो गई, जिससे राज्य पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा. उन्होंने कहा कि आमतौर पर राज्य Governmentें रिफाइनरी परियोजनाओं में इक्विटी हिस्सेदारी नहीं रखती हैं.

उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन कांग्रेस Government ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को परियोजना में निवेश के लिए मनाने से पहले Rajasthan के लिए 26 प्रतिशत हिस्सेदारी पर सफलतापूर्वक बातचीत की थी. उन्होंने कहा कि इससे जॉइंट वेंचर एचपीसीएल Rajasthan रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) का गठन संभव हो सका.

अशोक गहलोत ने Chief Minister भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि वे परियोजना के बारे में सार्वजनिक बयान देने से पहले राज्य प्रशासन और सचिवालय के पास मौजूद आधिकारिक फाइलों, रिकॉर्ड और दस्तावेजों को देखें. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि जनता तक सही जानकारी पहुंचे और ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश न किया जाए.

एसडी/डीकेपी

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