
Ahmedabad, 8 अगस्त . Ahmedabad नगर निगम (एएमसी) के पूर्व प्रोबेशनरी मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमित डोंगरे और उनके सह-आरोपी को फायर एनओसी मंजूर करने के बदले कथित रूप से 36 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में स्थानीय अदालत ने 12 अगस्त तक रिमांड पर भेज दिया है.
मामले में अमित डोंगरे और सह-आरोपी भावसिंह झाला को Wednesday , 12 अगस्त शाम 5 बजे तक रिमांड पर रखा जाएगा.
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 7 अगस्त को ट्रैप कार्रवाई के दौरान 47 वर्षीय अमित डोंगरे और 31 वर्षीय भावसिंह झाला को गिरफ्तार किया था.
एसीबी के अनुसार, Ahmedabad की छह अलग-अलग इमारतों के लिए फायर नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मंजूर कराने के बदले रिश्वत मांगी गई थी. आरोप है कि प्रत्येक एनओसी के लिए 6,000 रुपए की मांग की गई, यानी कुल 36,000 रुपए.
एसीबी के मुताबिक शिकायतकर्ता एक फायर सेफ्टी ऑफिसर है, जो Ahmedabad में इमारतों को अग्नि सुरक्षा संबंधी सेवाएं प्रदान करता है.
इन छह फायर एनओसी के लिए आवेदन राज्य Government के पोर्टल के माध्यम से किए गए थे. रिश्वत की मांग किए जाने के बाद शिकायतकर्ता ने वडोदरा सिटी एसीबी Police स्टेशन से संपर्क किया.
इसके बाद एसीबी ने Ahmedabad के मेमनगर क्षेत्र स्थित विजय क्रॉस रोड्स के पास यश इक्वा कॉम्प्लेक्स के निकट दो Governmentी पंच गवाहों की मौजूदगी में जाल बिछाया.
कार्रवाई के दौरान भावसिंह झाला ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से बातचीत की और 36 हजार रुपए की रिश्वत स्वीकार कर ली. एसीबी ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया और पूरी राशि बरामद कर ली.
एसीबी का यह भी दावा है कि ट्रैप के दौरान भावसिंह झाला ने फोन पर अमित डोंगरे से बात की थी. जांच एजेंसी के अनुसार, बातचीत के दौरान डोंगरे ने कथित रिश्वत राशि को लेकर सहमति जताई थी.
प्रारंभिक जांच के आधार पर एसीबी का आरोप है कि भावसिंह झाला ने अमित डोंगरे के कहने पर रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार किया. एजेंसी का कहना है कि दोनों आरोपियों ने एक-दूसरे की मदद करते हुए कथित अपराध को अंजाम दिया.
एसीबी की कार्रवाई के बाद Ahmedabad नगर निगम ने तत्काल प्रभाव से अमित डोंगरे की नियुक्ति समाप्त कर दी. वह नगर निगम के अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग में प्रोबेशनरी मुख्य अग्निशमन अधिकारी के पद पर कार्यरत थे.
अधिकारियों ने बताया कि Ahmedabad नगर निगम के फायर सर्विस पोर्टल पर जारी सभी एनओसी का रिकॉर्ड उपलब्ध है. जांच के दौरान दोनों आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और आपसी बातचीत की भी जांच की जाएगी.
एसीबी का कहना है कि आगे की जांच में आरोपियों की कथित भूमिका और मामले के व्यापक पहलुओं का खुलासा हो सकता है.
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एएमटी/डीकेपी