शिवरात्रि पर देवभूमि में आस्था का सैलाब, शिवालयों में लगा भक्तों का तांता

हरिद्वार, 11 अगस्त . सावन महीने की शिवरात्रि के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है. कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं. शिवभक्त गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं.

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात और चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि का पर्व आता है, लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है. उन्होंने कहा कि उत्तर India में कांवड़ की परंपरा के कारण सावन की शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है. जो श्रद्धालु पूरे सावन भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाते, वे महाशिवरात्रि पर गंगाजल और एक बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करें तो विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. उन्होंने कहा कि दक्षेश्वर महादेव भगवान शिव की ससुराल और राजा दक्ष की राजधानी रहा कनखल एक दिव्य और अलौकिक स्थान है.

दक्षेश्वर महादेव मंदिर में पहुंच रहे श्रद्धालुओं में भी शिवरात्रि को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है. महिला श्रद्धालु ज्योति शर्मा ने कहा कि यह भगवान शिव की ससुराल है और यहां जल चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है. उन्होंने कहा कि भोलेनाथ इतने सरल और दयालु हैं कि मात्र जल अर्पित करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं. सुबह से ही श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयकारों के बीच जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मनचाही कामना पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं.

वहीं, ऋषिकेश के पौराणिक वीरभद्र महादेव मंदिर में भी तड़के से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया. शिव भक्तों ने लंबी लाइनों में लगकर भगवान शिव का जल, दूध, पंचामृत, गन्ने के रस से जलाभिषेक किया और फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित किए. मंदिर परिसर में हर तरफ बम बम भोले और हर हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे.

श्रद्धालु कृष्णा बैलवाल ने कहा कि जैसा कि आज वीरभद्र महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में लोग आए हैं, क्योंकि यह एक पौराणिक सिद्ध पीठ मंदिर है, तो इस मंदिर के साथ लोगों की काफी मान्यताएं और आस्थाएं जुड़ी है. आज मैं अपने परिवार के साथ वीरभद्र महादेव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए आया था. मैंने भगवान शिव को जल चढ़कर अपने परिवार की सुख समृद्धि एवं शांति की कामना की.

श्रद्धालु बसंती शर्मा ने कहा कि सावन के पवित्र मास में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए दूर दराज के क्षेत्र से श्रद्धालु यहां आते हैं. यह बहुत प्राचीन मंदिर है. यहां पर भगवान वीरभद्र प्रकट हुए थे, तब से इस जगह का नाम वीरभद्र पड़ा है और मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी वीरभद्र के नाम से जाना जाता है. हम लोग इस वीरभद्र की भूमि पर ही रहते हैं, इसलिए इस मंदिर को हम बहुत मानते हैं. इस पावन सावन के पवित्र महीने में भोलेनाथ का दर्शन करना और आराधना करने का सौभाग्य बहुत पुण्य से मिलता है.

श्रद्धालु ममता नयाल ने कहा कि वीरभद्र महादेव भगवान भोलेनाथ का बहुत प्राचीन मंदिर है और इस मंदिर की बहुत मानता है, जो यहां पर श्रद्धालु आते हैं भगवान भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. यहां पर हमने परिवार के साथ आकर भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और भोलेनाथ से प्रार्थना की है कि वह हमारी सभी की मनोकामनाएं पूरी करें.

वीरभद्र मंदिर के प्रबंधक महंत राजगिरी महाराज ने कहा कि यह वीरभद्र महादेव मंदिर पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है. यहां पर भगवान शंकर का रूद्र रूप वीरभद्र विराजमान है और बड़ी संख्या में देश दुनिया और स्थानीय लोग आते हैं. हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव को चढ़ते हैं और अपनी मनोकामना उनके सामने रखते हैं. हमारे अखाड़ा परिषद निरंजनी श्री महंत डॉ रवींद्र पुरी की तरफ से भंडारे की व्यवस्था की जाती है.

उन्होंने बताया कि पूज्य महंत रविंद्र पुरी की कहावत है कि “एक लोटा जल और सभी समस्याओं का हल.” उन्होंने कहा कि महादेव की एक ऐसी भगवान है, जिनको आपका साज शृंगार फल फूल नहीं चाहिए, बस एक लोटा जल ही उनके लिए काफी है. सावन के महीने में महादेव पर जो भी एक लोटा जल चढ़ाता है, उसकी हर समस्या का हल हो जाता है.

पीआईएम/एएस

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