
ग्रेटर नोएडा, 17 अगस्त . नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर social media पर कथित तौर पर फर्जी और भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के मामले में जेवर Police ने कार्रवाई शुरू कर दी है. एयरपोर्ट प्रबंधन की शिकायत के आधार पर थाना जेवर में ‘सच बोलो’ नाम से संचालित फेसबुक अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि social media अकाउंट से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की स्थिति को गलत तरीके से दर्शाने वाला एक वीडियो प्रसारित किया गया, जिससे आम लोगों और यात्रियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है. Police को दी गई शिकायत के मुताबिक, यह वीडियो 14 अगस्त 2026 को ‘सच बोलो’ नाम के फेसबुक अकाउंट पर अपलोड किया गया था. वीडियो में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जलभराव जैसी स्थिति दिखाई गई थी.
एयरपोर्ट प्रबंधन ने इस वीडियो को गलत, भ्रामक और वास्तविक परिस्थितियों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाला बताया है. शिकायत में कहा गया है कि वीडियो social media पर तेजी से प्रसारित हो रहा है और इसके कारण बड़ी संख्या में लोग एयरपोर्ट की वास्तविक स्थिति को लेकर गुमराह हो सकते हैं. शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस तरह की सामग्री के प्रसार से न केवल अनावश्यक सार्वजनिक भ्रम और चिंता पैदा हो सकती है, बल्कि यात्रियों, हितधारकों और आम लोगों को भी एयरपोर्ट से जुड़ी गलत जानकारी मिल सकती है.
एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से यह आशंका भी जताई गई है कि कथित भ्रामक वीडियो से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है. शिकायत में इसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजना बताते हुए social media पर प्रसारित सामग्री की जांच और उसके संबंध में कानून के तहत उचित कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ से यह शिकायत मयंक कुमार, शिफ्ट इंचार्ज, सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन-एन की ओर से दी गई है.
अब Police कथित वीडियो के मूल स्रोत, उसे फेसबुक पर अपलोड करने वाले अकाउंट, वीडियो की वास्तविकता और उसके प्रसार की परिस्थितियों की जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि वीडियो को किस उद्देश्य से तैयार या प्रसारित किया गया और क्या इसमें जानबूझकर एयरपोर्ट की गलत तस्वीर पेश की गई थी.
जेवर थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में Police social media अकाउंट और वायरल वीडियो की तकनीकी जांच के साथ-साथ उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाल सकती है.
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पीकेटी/पीएम