वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों से सरकारी अनुबंधों में डब्ल्यूपीआई की जगह पीपीआई अपनाने का आग्रह किया

New Delhi, 16 अगस्त . वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों से आग्रह किया है कि वे भविष्य के Governmentी खरीद अनुबंधों में दर वृद्धि और समायोजन संबंधी प्रावधानों के लिए मौजूदा थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित व्यवस्था की जगह उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) को अपनाएं.

वाणिज्य मंत्रालय ने इस साल जून से वस्तुओं और सेवाओं, दोनों के लिए मासिक पीपीआई आंकड़े जारी करना शुरू किया है, ताकि उत्पादक स्तर पर कीमतों में होने वाले बदलाव को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके. डब्ल्यूपीआई से पीपीआई की ओर यह बदलाव विकसित अर्थव्यवस्थाओं द्वारा अपनाई गई वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की सिफारिशों के अनुरूप है.

आधिकारिक बयान के अनुसार,आउटपुट पीपीआई और इनपुट पीपीआई दोनों की उपलब्धता से किसी उद्योग में तैयार उत्पादों और इस्तेमाल किए जा रहे इनपुट की कीमतों में होने वाले बदलाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है. इससे यह भी समझने में मदद मिलती है कि इनपुट की कीमतों में उत्पादकों द्वारा झेली गई महंगाई का असर तैयार उत्पादों की कीमतों पर किस तरह पड़ता है.

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने सभी मंत्रालयों को भेजे एक पत्र में कहा, “पीपीआई उपलब्ध होने के बाद मंत्रालयों/विभागों को भविष्य के अनुबंधों में सभी मूल्य वृद्धि संबंधी प्रावधानों में डब्ल्यूपीआई की जगह उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.”

2022-23 को आधार वर्ष मानकर डब्ल्यूपीआई महंगाई की संशोधित श्रृंखला पहली बार 15 जून को जारी की गई थी. इस नई आधार श्रृंखला ने 2011-12 को आधार वर्ष मानने वाली पिछली डब्ल्यूपीआई श्रृंखला की जगह ली है.

इसके अलावा, 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए नई आउटपुट पीपीआई श्रृंखला, ट्रायल इनपुट पीपीआई और सात सेवाओं के लिए सर्विस पीपीआई की नई श्रृंखला भी जारी की गई है. इन सात सेवाओं में बैंकिंग, प्रतिभूति लेनदेन, बीमा, पेंशन फंड प्रबंधन, रेलवे, हवाई यात्री सेवाएं और दूरसंचार शामिल हैं.

मूल्य वृद्धि संबंधी प्रावधानों में डब्ल्यूपीआई के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए संशोधित श्रृंखला जारी होने की तारीख से पांच वर्षों तक डब्ल्यूपीआई को पीपीआई के साथ जारी किया जाएगा और उसके बाद इसे बंद कर दिया जाएगा. बयान के अनुसार, इससे उपयोगकर्ताओं को डब्ल्यूपीआई से पीपीआई की ओर स्थानांतरित होने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा.

पहले चरण में सात सेवाओं के सर्विस पीपीआई को प्रशासनिक स्रोतों से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है. आंकड़ों की उपलब्धता के आधार पर अगले चरणों में सर्विस पीपीआई की सूची में और सेवाओं को शामिल करने की योजना है.

डब्ल्यूपीआई और आउटपुट पीपीआई का संकलन मासिक आधार पर किया जा रहा है. नई डब्ल्यूपीआई श्रृंखला में कुल वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है. ‘बिजली’ समूह के तहत सौर और पवन ऊर्जा जैसे नए ऊर्जा स्रोतों को शामिल किया गया है. इसके अलावा, परमाणु बिजली को भी इस बास्केट में शामिल किया गया है.

कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को ‘प्राथमिक वस्तुओं’ से हटाकर ‘ईंधन और बिजली’ खंड में स्थानांतरित किया गया है. बयान के अनुसार, इससे वर्गीकरण बेहतर होगा, क्योंकि इस समूह में पहले से ही कोयला, बिजली और पेट्रोलियम उत्पाद जैसे प्रमुख ईंधन शामिल हैं.

बयान में कहा गया है कि नई डब्ल्यूपीआई श्रृंखला में भार निर्धारित करने की बेहतर पद्धति, गणना की बेहतर प्रक्रिया और उपलब्ध नहीं होने वाले मूल्य आंकड़ों का अनुमान लगाने के लिए बेहतर तरीका भी शामिल किया गया है.

एबीएस

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