ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई जरूरी, युवा पीढ़ी को नशे से बचाना हमारी जिम्मेदारी: समीर वानखेड़े

Mumbai , 14 अगस्त . Maharashtra के एंटी-ड्रग कैंपेन का समर्थन करते हुए आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने India को नशामुक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया. ड्रग्स विरोधी अभियानों का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाना जरूरी है.

समीर वानखेड़े ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi की ओर से ड्रग्स को खत्म करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में लगातार काम करने की जरूरत है. उन्होंने Maharashtra में Chief Minister देवेंद्र फडणवीस की ओर से चलाए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया.

वानखेड़े ने कार्यक्रम को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक महत्वपूर्ण पहल बताया. उन्होंने कहा कि Prime Minister मोदी ने ड्रग्स को खत्म करने के लिए दो साल और 100 सप्ताह की योजना पर जोर दिया है. इसी क्रम में Maharashtra में भी नशे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि इसी अभियान को बांद्रा जैसे प्रभावित क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिश की गई है. ऐसे इलाकों में जाकर काम करने का उद्देश्य उन लोगों तक सीधे पहुंचना है, जहां ड्रग्स से जुड़े मामले सामने आते हैं और जहां युवा तथा स्कूली बच्चे रहते हैं. फाउंडेशन की ओर से बांद्रा में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य ‘ग्राउंड जीरो’ पर जाकर बच्चों और युवाओं के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता पैदा करना है. इसी वजह से वह कार्यक्रम में शामिल हुए.

वानखेड़े ने देश की युवा आबादी को ड्रग्स के खतरे से बचाने को बड़ी चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि 18 से 35 वर्ष के आयु वर्ग में आने वाले युवा देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं और यदि इतनी बड़ी आबादी नशे के संपर्क में आती है तो इसका असर केवल वर्तमान पर नहीं, बल्कि देश के भविष्य पर भी पड़ सकता है. आज अगर ड्रग्स के खतरे को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसलिए नशे की समस्या से निपटने के लिए अभी से प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है.

उन्होंने बताया कि इस लड़ाई में कानून का 100 फीसदी प्रभावी क्रियान्वयन और ड्रग अवेयरनेस कैंपेन, दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. सिर्फ कार्रवाई करने से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होगा. लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं को नशे के नुकसान के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है. वानखेड़े ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ अभियान को दो स्तरों पर आगे बढ़ाने की जरूरत है. एक तरफ कानून के तहत नशे के कारोबार और इसकी सप्लाई के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ समाज में जागरूकता पैदा की जानी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा कि बच्चों और युवाओं को शुरुआत से ही नशे के खतरों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे ड्रग्स के संपर्क में आने से बच सकें. स्कूलों और प्रभावित इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

एपडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर से तंबाकू और अन्य नुकसानदायक उत्पादों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर भी वानखेड़े ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए नशीले पदार्थों, तंबाकू या अन्य हानिकारक चीजों के खिलाफ कार्रवाई करता है, वह अपने दायित्व का निर्वहन कर रहा है. Governmentी अधिकारियों की जिम्मेदारी ही है कि वे कानून को लागू करें और समाज को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करें.

वानखेड़े ने कहा कि कोई अधिकारी कुछ ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ नहीं कर रहा, बल्कि यह सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है. राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और अपनी नौकरी के तहत मिलने वाले दायित्व के कारण सभी अधिकारियों को इसी तरह काम करना चाहिए. देश के सामने ड्रग्स की समस्या एक गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए सभी स्तरों पर कार्रवाई करनी होगी. नशे के कारोबार को रोकने के साथ-साथ युवाओं को इसके खतरे से बचाना भी जरूरी है.

पीएसके

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