
New Delhi, 17 अगस्त . सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान (एसएसआईएफ) में आईएफएस अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस ट्रेनिंग कार्यक्रम के बीच में India के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने 2002 और 2003 बैच के आईएफएस अधिकारियों से मुलाकात की.
विदेश मंत्री जयशंकर ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा कर लिखा, “सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम कर रहे 2002 और 2003 बैच के आईएफएस अधिकारियों से बात करके खुशी हुई. मैंने उनसे चर्चा की कि कैसे पिछले एक दशक में India की विदेश नीति विकसित हुई है, जिसकी शुरुआत पड़ोस से हुई.”
उन्होंने अधिकारियों को समझाया कि क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी सहयोग और आर्थिक एकीकरण को प्राथमिकता देकर India ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नई दिशा दी है. इस नीति के तहत बुनियादी ढांचे, संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया गया.
विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि दुनिया इस समय अभूतपूर्व बदलावों के दौर से गुजर रही है. भू-Political समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, नई तकनीकें वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं और कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव आया है.
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में एक कूटनीतिज्ञ के लिए इन बदलावों से सही सबक लेना और उन्हें नीति में शामिल करना जरूरी है. डॉ. जयशंकर ने अधिकारियों से कहा कि India आज दुनिया में एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में उभर रहा है. जी-20 की अध्यक्षता, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर India की भूमिका बढ़ी है. ऐसे में विदेश सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे India के हितों को मजबूती से आगे बढ़ाएं.
बता दें कि सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में आयोजित यह मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम आईएफएस अधिकारियों को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम में विदेश नीति, कूटनीतिक कौशल, आर्थिक कूटनीति और मीडिया प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है.
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केके/एबीएम