यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ पास किया प्रस्ताव

ब्रसेल्स, 10 जुलाई . यूरोपीय संसद ने Pakistan में धार्मिक अल्पसंख्यकों की कम उम्र की लड़कियों के अपहरण, जबरदस्ती धर्म बदलने और बाल विवाह की कड़ी आलोचना की है. यूरोपीय संसद में एक प्रस्ताव पास किया गया और इस तरह के गलत कामों के बड़े पैटर्न पर चिंता जताई गई.

यूरोपीय संसद के अनुसार, प्रस्ताव में खास तौर पर मारिया शाहबाज के मामले पर जोर दिया गया, जो एक 13 साल की Pakistanी ईसाई लड़की थी. मारिया का मार्च 2026 में अपहरण कर इस्लाम में धर्म परिवर्तन कर दिया गया. इसके बाद जबरदस्ती उसका अपहरण करने वाले शख्स से ही उसकी शादी करा दी गई.

यूरोपीय पार्लियामेंट के सदस्यों (एमईपी) ने उसके कानूनी रिप्रेजेंटेशन, परिवार तक पहुंच और साइकोलॉजिकल समर्थन सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया.

2025 के यूएन के आंकड़ों का हवाला देते हुए, प्रस्ताव में कहा गया कि Pakistan में शादी के जरिए जबरदस्ती धर्म बदलने से प्रभावित महिलाओं और लड़कियों में से लगभग 75 फीसदी हिंदू और 25 फीसदी ईसाई थीं.

यूरोपीय पार्लियामेंट ने कहा, “एमईपी उसे कानूनी मदद, उसके परिवार और साइकोलॉजिकल सपोर्ट देने की मांग कर रहे हैं. वे धार्मिक माइनॉरिटी से जुड़ी कम उम्र की लड़कियों के साथ इसी तरह के गलत कामों की निंदा करते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि उसका मामला Pakistan में माइनॉरिटी द्वारा झेले जा रहे बड़े मानवाधिकार के उल्लंघन का एक उदाहरण है; 2025 में यूएन के आंकड़ों के अनुसार, शादी के जरिए जबरदस्ती धर्म बदलने से प्रभावित महिलाओं और लड़कियों में से लगभग 75 फीसदी हिंदू और 25 फीसदी ईसाई थीं.”

इसमें आगे कहा गया, “संसद Pakistan के अधिकारियों से अपील करती है कि वे बाल विवाह को खत्म करने के लिए देश के नेशनल फ्रेमवर्क को पूरी तरह से लागू करें, जैसा कि देश के कुछ प्रांतों में पहले से ही हो रहा है और अल्पसंख्यकों की अगवा की गई या जबरन धर्म बदलवाई गई लड़कियों के परिवारों की शिकायतों को संभालने के लिए एक नेशनल सिस्टम बनाएं.”

एमईपी ने पूरे Pakistan में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की और Pakistanी Government से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि नाबालिगों या जबरदस्ती के आरोपों से जुड़े सभी मामलों की जांच पारदर्शिता और खुली प्रक्रिया से की जाए.

उन्होंने Pakistanी अधिकारियों से जिम्मेदार लोगों पर केस चलाने, देश के कानूनी सिस्टम को मजबूत करने और किडनैप हुई लड़कियों को उनके परिवारों तक सुरक्षित वापस पहुंचाने की भी अपील की.

अप्रैल की शुरुआत में, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने Pakistan में अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं और लड़कियों को टारगेट करके लगातार और बड़े पैमाने पर अपहरण करने, जबरदस्ती धर्म बदलने और शादियों पर गहरी चिंता जताई थी. इसके साथ ही चेतावनी दी थी कि सजा से छूट का माहौल पूरे देश में इस लगातार चल रहे इस तरह के अभ्यास को बढ़ावा दे रहा है.

विशेषज्ञों ने कहा, “धर्म या विश्वास में कोई भी बदलाव सच में बिना किसी दबाव के होना चाहिए और शादी पूरी सहमति पर आधारित होनी चाहिए, जो कानूनी तौर पर तब मुमकिन नहीं है जब पीड़ित बच्ची हो.”

विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा कि Pakistan Government ने शादी के जरिए जबरदस्ती धर्म बदलने की असली वजहों को दूर करने के लिए सही कदम नहीं उठाए हैं, जिसमें पुरुष प्रधान समाज के नियमों के आधार पर लिंग की समानता, गरीबी, सोशल एक्सक्लूजन, अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव, धार्मिक असहिष्णुता और बड़े पैमाने पर सजा से छूट शामिल है.

विशेषज्ञों ने कहा, “बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए धर्म या विश्वास की आजादी और बराबरी सुनिश्चित होनी चाहिए.”

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केके/पीएम

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