तमिलनाडु में बदले समीकरण, डीएमके के साथ जाने की संभावना नहीं: सीपीआई

चेन्नई, 11 जून . तमिलनाडु की राजनीति में बदलते गठबंधन समीकरणों के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह डीएमके के नेतृत्व वाले चुनावी गठबंधन का हिस्सा नहीं बन सकती.

सीपीआई के तमिलनाडु राज्य सचिव एम. वीरापांडियन ने Thursday को कहा कि हालिया विधानसभा चुनावों के बाद राज्य का Political परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है और पुराने गठबंधन ढांचे के तहत आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं है.

दो दिवसीय राज्य कार्यकारिणी बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में वीरापांडियन ने कहा कि कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके), जो पहले डीएमके नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रमुख सहयोगी थे, अब तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) Government का हिस्सा हैं, जबकि वामपंथी दल Government को बाहर से समर्थन दे रहे हैं.

उन्होंने कहा, “कांग्रेस गठबंधन से अलग हो चुकी है, डीएमके ने भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं रहने की घोषणा कर दी है और कई अन्य दल टीवीके Government में शामिल हो चुके हैं. ऐसे में पहले वाला चुनावी गठबंधन अब एकजुट मोर्चे के रूप में जारी नहीं रह सकता.”

हालांकि, वीरापांडियन ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को छोड़कर सीपीआई तमिलनाडु के किसी भी बड़े Political दल को अपना दुश्मन नहीं मानती. उन्होंने कहा कि पार्टी डीएमके, एआईएडीएमके और टीवीके को लोकतांत्रिक ताकतों के रूप में देखती है और जनकल्याण, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, किसानों तथा श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर इनके साथ सहयोग के लिए तैयार है.

टीवीके Government को बाहर से समर्थन देने के फैसले पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जनता के जनादेश का सम्मान कर रही है. उन्होंने कहा कि टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में Government बनाने का उसे अधिकार है.

वीरापांडियन ने इस बात से भी इनकार किया कि पूर्व Chief Minister एम.के. स्टालिन ने सीपीआई के Political फैसलों को प्रभावित किया है. उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टियां सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और संगठनात्मक विचार-विमर्श के आधार पर काम करती हैं.

उन्होंने कहा कि फिलहाल डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने का सवाल नहीं उठता, लेकिन भविष्य में उपचुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, विधानसभा और Lok Sabha चुनावों को लेकर पार्टी उस समय की Political परिस्थितियों के अनुसार वामपंथी और लोकतांत्रिक दलों के साथ मिलकर निर्णय लेगी.

डीएससी

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