ईडी की बड़ी कार्रवाई, चिटफंड घोटाला मामले में दो राज्यों में 5 जगहों पर छापेमारी

भुवनेश्वर, 10 अगस्त . Enforcement Directorate (ईडी) के भुवनेश्वर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत 5 अगस्त को विशाखापत्तनम और हैदराबाद में वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (डब्ल्यूबीईपीएल) और इसके निदेशकों मल्ला विजया प्रसाद, वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अल्ला और अन्य से जुड़ी पांच आवासीय/व्यावसायिक जगहों पर तलाशी अभियान चलाया.

ईडी ने इसी को लेकर Monday को एक प्रेस विज्ञप्ति कर जानकारी दी कि यह कार्रवाई करोड़ों रुपए के चिट फंड घोटाले की जांच के सिलसिले में की गई. तलाशी अभियान के दौरान, 1.01 करोड़ रुपए नकद के साथ-साथ कई चल और अचल संपत्तियों का विवरण और डब्ल्यूबीईपीएल, इसके निदेशकों और संबंधित संस्थाओं से जुड़े आपत्तिजनक सामान/दस्तावेज (जैसे संपत्ति के कागजात, विभिन्न डिजिटल डिवाइस) बरामद और जब्त किए गए. इसके अलावा ईडी ने डब्ल्यूबीईपीएल और इसके निदेशकों के 182 बैंक खातों और छह महंगी लग्जरी गाड़ियों को फ्रीज करने के आदेश जारी किए.

ईडी ने यह जांच कई First Information Report और उसके बाद इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (भुवनेश्वर), सीबीआई, एसीबी (धनबाद), Odisha Police द्वारा दायर चार्जशीट और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) की शिकायत के आधार पर शुरू की थी. ये सभी शिकायतें डब्ल्यूबीईपीएल और इसके निदेशकों के खिलाफ थीं.

जांच से पता चला है कि डब्ल्यूबीईपीएल के निदेशकों और प्रबंध निदेशक ने रियल एस्टेट कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर जमा राशि जुटाने की योजना चलाई. उन्होंने कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए जनता से 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की भारी धनराशि जमा की.

वे पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए नए निवेशकों से मिले पैसे का इस्तेमाल करते थे. निवेशकों के पैसे को गैर-संबंधित कामों और निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करते थे. जमा राशि को छिपाने के लिए अपने वित्तीय विवरणों में हेरफेर करते थे और जमीन के ऐसे अनियमित लेनदेन करते थे, जिनका मकसद असली कीमत को छिपाना और कानूनी दायित्वों से बचना था.

ईडी की अब तक की जांच से पता चला है कि ये फंड Odisha, पश्चिम बंगाल, बिहार, Jharkhand, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों के हजारों भोले-भाले निवेशकों से अलग-अलग स्कीमों के जरिए गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा किए गए थे. कंपनी ने विशाखापत्तनम में जमीन देने का झूठा वादा किया था और India के कई राज्यों में मौजूद अपनी शाखाओं से कामकाज बंद कर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की थी. वहीं, इस मामले को लेकर ईडी की ओर से आगे की जांच जारी है.

डीके/पीएम

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