
गुवाहाटी, 30 मार्च . ईडी ने असम में आयुष्मान भारत-Prime Minister जन आरोग्य योजना के तहत बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जांच के सिलसिले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत कुल लगभग 29.77 लाख रुपए की कीमत वाली अचल और चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है.
ईडी की जांच असम के हैलाकांडी के अल्गापुर Police स्टेशन में दर्ज First Information Report और बाद में नोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अल्गापुर, हैलाकांडी के मालिक डॉ. नोजमुल इस्लाम चौधरी के खिलाफ इंडियन पीनल कोड, 1860 के सेक्शन 420 (धोखाधड़ी) और 468 (धोखाधड़ी के मकसद से जालसाजी) के तहत अपराध करने के लिए फाइल की गई चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी. यह पीएमएलए, 2002 के शेड्यूल के पार्ट ए के तहत तय अपराध है.
ईडी की जांच में पता चला कि नोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को अटल अमृत अभियान सोसाइटी के माध्यम से असम में लागू आयुष्मान भारत-Prime Minister जन आरोग्य योजना के तहत पैनल में शामिल किया गया था. हॉस्पिटल ने 22 फरवरी 2019 से पांच नवंबर 2022 के बीच बेनिफिशियरी को कोई असली मेडिकल ट्रीटमेंट दिए बिना, धोखे से 920 नकली रीइंबर्समेंट क्लेम किए. जिनकी कीमत लगभग 77.83 लाख रुपए थी.
हॉस्पिटल ने आयुष्मान भारत-Prime Minister जन आरोग्य योजना के कार्ड होल्डर्स को लालच दिया और हॉस्पिटल के बेड पर लेटे हुए उनकी फोटो खींची. उन्हें गलत तरीके से हॉस्पिटल में भर्ती दिखाने के लिए और ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पर नकली ट्रीटमेंट रिकॉर्ड अपलोड किए. ऐसे ट्रीटमेंट खर्चों के लिए रीइंबर्समेंट क्लेम बनाकर और जमा करके इस स्कीम का सिस्टमैटिक तरीके से फायदा उठाया.
अटल अमृत अभियान सोसाइटी ने हॉस्पिटल के बैंक अकाउंट में (टीडीएस काटने के बाद) लगभग 69.42 लाख रुपए भेजे. जो केनरा बैंक, हैलाकांडी ब्रांच में हैं. जांच में पैसे के ट्रेल का पता चला और पता चला कि गलत तरीके से हुई कमाई को एटीएम से कैश निकाला गया. फिर एक्सिस बैंक में आरोपी के पर्सनल बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया गया. अलग-अलग लोगों को यूपीआई ट्रांजैक्शन करके और आरोपी के भाई समेत उससे जुड़े लोगों को ट्रांसफर करके सिस्टमैटिक तरीके से निकाला और लॉन्ड्र किया गया.
जांच में नोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की धोखाधड़ी की जानकारी अटल अमृत अभियान सोसाइटी की एक टीम के बेनिफिशियरी ऑडिट के बाद पता चला. जिससे खुलासा हुआ कि हॉस्पिटल के ज्यादातर पेमेंट क्लेम झूठे और मनगढ़ंत थे. जिन बेनिफिशियरी को क्लेम में इनडोर पेशेंट के तौर पर दिखाया गया था, वे सिर्फ आउटपेशेंट के तौर पर हॉस्पिटल आए थे और वे कभी भर्ती नहीं हुए थे. इसलिए, हॉस्पिटल को 21 नवंबर 2022 के ऑर्डर के जरिए एबी-पीएमजेएवाई स्कीम से डी-एम्पेनल कर दिया गया और First Information Report दर्ज की गई. हॉस्पिटल को साल 2023 में बंद कर दिया गया.
जांच से पता चला है कि गलत तरीके से कमाया पैसा तेजी से खर्च हुआ और हॉस्पिटल के बैंक अकाउंट खाली करके बंद कर दिए गए. जुर्म की कमाई सीधे तौर पर मौजूद न होने की वजह से, ईडी ने पीएमएलए, 2002 के सेक्शन 2(1)(यू) के तहत बताई गई कमाई की कीमत की संपत्तियों को जबत कर ली है. इस मामले में आगे की जांच चल रही है.
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एसडी/पीएसके