
New Delhi, 9 अगस्त . Enforcement Directorate (ईडी) ने आरकॉम के खिलाफ चल रहे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के मामले में एक पूरक शिकायत दर्ज की है. यह जानकारी Governmentी एजेंसी की ओर से Sunday को दी गई.
पूरक शिकायत, पहले दर्ज की गई शिकायत में एक अतिरिक्त शिकायत होती है, जिसमें मामले जुड़ी कई नई और अहम जानकारी दी जाती हैं.
जांच एजेंसी ने बताया कि 27 मार्च की पहली अभियोजन शिकायत के क्रम में Saturday को अतिरिक्त अभियोजन शिकायत दायर की गई.
ईडी के बयान में कहा गया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल), गौतम भाईलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को पीएमएलए, 2002 की धारा 4 के तहत सजा-योग्य अपराधों, धारा 3 और धारा 70 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 3 के लिए आरोपी बनाया गया है.
अपराध से हासिल रकम का मूल्य 40,185.55 करोड़ रुपए लगाया गया है. यह वह कुल बकाया रकम है जिसका भुगतान उधार लेने वाली कंपनियों ने कंसोर्टियम बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डहोल्डर्स को नहीं किया है. फंड जुटाने, इस्तेमाल करने, छिपाने और दिखाने में आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का पता चला है. इसमें फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (एफसीसीबी) से मिली 1 अरब डॉलर की रकम के अंतिम इस्तेमाल के बारे में गलत सर्टिफिकेशन भी शामिल है.
न्यायनिर्णायक प्राधिकारी द्वारा अटैच और कन्फर्म की गई 8,078.06 करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त करने की मांग की गई है. इन संपत्तियों में New Delhi, नवी Mumbai , भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में लीजहोल्ड और अचल संपत्तियां शामिल हैं.
इस ईसीआईआर के तहत, दोषी को इस साल 12 जून को और सेठ को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था. दोनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं.
पीएमएलए मामलों की स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में मुख्य अभियोजन शिकायत का संज्ञान 15 जून को लिया.
ईडी ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों पर सीबीआई, बैंकिंग सिक्योरिटीज और फ्रॉड ब्रांच, New Delhi द्वारा दर्ज कई First Information Report के आधार पर जांच शुरू की. ये अपराध आरकॉम, आरटीएल और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड द्वारा फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं का धोखाधड़ी से लाभ उठाने और उनके डायवर्जन से जुड़े हैं. जांच में कई आपस में जुड़े हुए ट्रांजैक्शन शामिल हैं.
जांच से पता चला कि फंड के मंजूर किए गए इस्तेमाल के बजाय, नई क्रेडिट सुविधाओं का बार-बार धोखाधड़ी से इस्तेमाल पुरानी घरेलू और विदेशी देनदारियों को चुकाने, घुमाने और ‘एवरग्रीन’ (लगातार रिन्यू) करने के लिए किया गया.
फंड को ग्रुप कंपनियों, खास मकसद के लिए बनाई गई कंपनियों, कई बैंक अकाउंट और लिक्विड म्यूचुअल फंड के जरिए घुमाया गया; इनका इस्तेमाल पुरानी एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी) और फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (एफसीसीबी) के भुगतान के लिए किया गया और इन्हें वैध व्यावसायिक खर्च या प्राप्ति के तौर पर दिखाया गया.
जांच में यह भी पता चला कि धोखाधड़ी की यह योजना बहुत पहले, कम से कम 2007 में शुरू हो गई थी और उसके बाद भी आपराधिक गतिविधि के एक जुड़े हुए और लगातार चलने वाले सिलसिले के तौर पर जारी रही. लोन से मिली रकम को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी ग्रुप कंपनियों में डायवर्ट किया गया. लोन की रकम का इस्तेमाल प्रमोटरों के लिए India के बाहर निजी संपत्ति खरीदने और आरकॉम के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए भी किया गया.
बयान में कहा गया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है.
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एबीएस