
वॉशिंगटन, 31 मार्च . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने Tuesday को अपने प्रमुख पश्चिमी सहयोगी देशों फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम पर तीखा हमला बोला. उन्होंने इन देशों पर ईरान के खिलाफ वॉशिंगटन की कार्रवाई का समर्थन न करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि भविष्य के संकटों में अमेरिका उनकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा.
फ्रांस की आलोचना करते हुए कहा कि उसने इजरायल जा रहे और सैन्य साजो-सामान से लदे अमेरिकी विमानों को अपने क्षेत्र से उड़ने की अनुमति नहीं दी. साथ ही उन्होंने ईरान संघर्ष पर यूनाइटेड किंगडम के रुख को लेकर भी उस पर निशाना साधा.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में लिखा, “फ्रांस देश ने इजरायल जा रहे उन विमानों को अपने क्षेत्र से उड़ने नहीं दिया, जो सैन्य साजो-सामान से लदे हुए थे. फ्रांस ने ईरान के मामले में बिल्कुल भी मदद नहीं की, जिसे हमने सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है. अमेरिका इस बात को हमेशा याद रखेगा.”
ये टिप्पणियां नाटो के पुराने सहयोगी देशों के प्रति ट्रंप के तेवरों में आई एक बड़ी तल्खी को दर्शाती हैं. वॉशिंगटन इस बात से नाराज है कि ईरान के खिलाफ उसके अभियानों में यूरोपीय देशों से उसे उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला है.
ट्रंप ने उन देशों को भी एक कड़ा संदेश दिया, जिनकी ऊर्जा आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण बाधित हुई है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है.
उन्होंने कहा कि वे सभी देश जिनको होर्मुज स्ट्रेट की वजह से जेट ईंधन नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए मेरे पास सुझाव है. अमेरिका से खरीदें, हमारे पास इसकी कोई कमी नहीं है. या फिर थोड़ी हिम्मत जुटाएं, होर्मुज स्ट्रेट तक जाएं.
उन्होंने आगे कहा कि जो सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई में हिस्सा लेने को तैयार नहीं हैं, उन्हें अब अमेरिका के समर्थन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.
ट्रंप ने कहा, “आप लोगों को अब अपने लिए खुद लड़ना सीखना होगा. अमेरिका अब आपकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप हमारे मुश्किल वक्त में हमारे साथ खड़े नहीं हुए.”
President ने दावा किया कि अमेरिका की कार्रवाई के चलते ईरान पहले ही काफी कमजोर हो चुका है.
उन्होंने लिखा, “ईरान असल में पूरी तरह से तबाह हो चुका है. मुश्किल काम पूरा हो चुका है. अब जाइए और अपना तेल खुद हासिल कीजिए.”
इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि मध्य पूर्व में सैन्य रणनीति और जिम्मेदारी साझा करने को लेकर वाशिंगटन और उसके यूरोपीय साझेदारों के बीच दूरी बढ़ रही है.
फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम पारंपरिक रूप से नाटो में अमेरिका के प्रमुख सहयोगी रहे हैं और खाड़ी क्षेत्र सहित सुरक्षा मामलों में करीबी तालमेल रखते आए हैं.
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एवाई/डीएससी