संसद में परिसीमन विधेयक दोबारा पेश करने पर डीएमके विरोध करे : कांग्रेस

चेन्नई, 16 जुलाई . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने डीएमके से आग्रह किया है कि वह प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का विरोध जारी रखे. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पार्टी अपने रुख में कोई बदलाव करती है, तो यह उसके अपने सिद्धांतों के साथ विश्वासघात होगा.

खबरों के अनुसार, भाजपा संसद के आगामी मानसून सत्र, जो 20 जुलाई से शुरू होने वाला है, उस दौरान संसदीय परिसीमन पर प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन को फिर से पेश करने की तैयारी कर रही है. इससे पहले, जब अप्रैल 2026 के सत्र में संसद में बिल पेश किया गया था, तो मंजूरी नहीं मिल पाई थी.

मीडिया से बातचीत के दौरान कार्ति चिदंबरम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डीएमके उसी रुख पर कायम रहेगी जो उसने इस साल की शुरुआत में बिल पर बहस के दौरान अपनाया था.

उन्होंने भरोसा जताया कि अगर इस कानून को संसद में दोबारा लाया जाता है, तो पार्टी इसका विरोध जारी रखेगी.

तमिलनाडु की नई चुनी हुई Government के बारे में बात करते हुए कार्ति ने कहा कि उसके कामकाज का मूल्यांकन उसके पहले पूर्ण बजट पेश होने के बाद ही करना सही होगा. Government के पास विधानसभा में मजबूत बहुमत है, इसलिए उसे Political जोड़-तोड़ या विरोधी पार्टियों को अस्थिर करने की कोशिशों का सहारा लेने की जरूरत नहीं है और वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने की अच्छी स्थिति में है.

हिरासत में होने वाली मौतों पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि ऐसी घटनाएं अलग-अलग Governmentों के समय में होती रही हैं और इन्हें सिर्फ एक प्रशासन की जिम्मेदारी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

उन्होंने तर्क दिया कि Police व्यवस्था में गहरे सुधार की जरूरत है और जोर दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए संस्थागत संस्कृति में बदलाव जरूरी है. मंत्रियों या विधायकों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से उचित प्रक्रिया के जरिए तेजी से निपटा जाना चाहिए.

उन्होंने छात्रों से जुड़ी हिंसा की घटनाओं पर कहा कि जिम्मेदारी सिर्फ Government की नहीं हो सकती. उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और छात्रों के बीच ज्यादा जवाबदेही और जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया.

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डीकेएम/एबीएम

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