
Bhopal , 24 जून . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और Madhya Pradesh के पूर्व Chief Minister दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में लगातार दूसरा कार्यकाल 21 जून को पूरा हो गया. इस तरह उनका 12 साल का कार्यकाल समाप्त हुआ. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और शिक्षा से लेकर किसानों की चिंताओं और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों को लगातार उठाया.
दिग्विजय सिंह के संसदीय सफर पर बात करते हुए उनके निजी सचिव ओपी शर्मा ने को बताया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उच्च सदन में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान संसदीय कार्यवाही और समिति के कामकाज में सक्रिय रूप से शामिल रहे.
शर्मा के अनुसार, सिंह ने पिछले 12 वर्षों में संसद में शासन, जन कल्याण, कृषि, शिक्षा, आंतरिक सुरक्षा और संवैधानिक मुद्दों से जुड़े 1,010 सवाल उठाए.
शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए हमेशा संसदीय मंचों का इस्तेमाल किया. चाहे किसान हों, छात्र हों, मजदूर हों या शासन-प्रशासन से जुड़े मामले हों, उन्होंने उन चिंताओं को संसद के सामने लाने की कोशिश की.
1977 से कांग्रेस के नेता रहे दिग्विजय सिंह ने अपने Political करियर में कई अहम पदों पर काम किया है. वे पांच बार विधायक रहे, Madhya Pradesh Government में कृषि, सिंचाई और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली, Lok Sabha में राज्य का प्रतिनिधित्व किया और 2014 में राज्यसभा में जाने से पहले 1993 से 2003 तक Chief Minister रहे.
सदन में बहस और चर्चाओं में हिस्सा लेने के अलावा, दिग्विजय सिंह कई संसदीय समितियों में भी शामिल रहे, जिनमें गृह मामले, वित्त, कॉर्पोरेट मामले और शहरी विकास से जुड़ी समितियां शामिल हैं.
वे नियम समिति, विशेषाधिकार समिति और कानून की जांच के लिए बनाई गई कई चुनिंदा समितियों के सदस्य भी थे.
शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह के कुछ अहम योगदान संसदीय समितियों के जरिए सामने आए.
शर्मा ने कहा कि जब मणिपुर में बड़े पैमाने पर हिंसा हो रही थी, तो उनका मानना था कि संसदीय समितियों को इस संकट और इसके मानवीय असर पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने समिति के सामने औपचारिक रूप से यह मुद्दा उठाया था.
पूर्व Chief Minister के निजी सचिव ने शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के तौर पर दिग्विजय सिंह के कार्यकाल का भी जिक्र किया.
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एमएस/