
New Delhi, 25 फरवरी . दक्षिण पश्चिम जिले के साइबर Police स्टेशन ने jaipur से चल रहे डिजिटल अरेस्ट रैकेट का भंडाफोड़ किया. साइबर Police ने तीन कुख्यात साइबर अपराधी राकेश मीणा (25), छोटू लाल मीणा (20) और योगेंद्र गुर्जर (19) को गिरफ्तार किया है. इनके कब्जे से 1 लाख रुपए, 9 मोबाइल फोन और 10 पासबुक और चेकबुक बरामद हुए हैं.
डीएसपी अमित गोयल के मुताबिक, 7 दिसंबर 2025 को दक्षिण पश्चिम जिले के साइबर Police स्टेशन में 75 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें कथित सीबीआई इंस्पेक्टर का व्हाट्सएप कॉल आया, जिसने उनके बेटे को आपराधिक मामले में फंसे होने की बात की. इसके बाद बेटे को केस से बचाने के लिए दो दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर जालसाजों ने उससे अपने खातों में 16 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए थे.
डीएसपी अमित गोयल के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया. टीम ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण, सिम ट्रैकिंग, social media विश्लेषण और धन के लेनदेन की जांच शुरू की. जांच के दौरान पता चला कि Rajasthan के jaipur से संचालित एक गिरोह धोखाधड़ी से ट्रांसफर कराए गए पैसे कोटपुतली के बैंक खाते में जमा हुए थे. जांच में कोटपुतली से सक्रिय एक एजेंट योगेंद्र गुर्जर की पहचान हुई.
इसके बाद कोटपुतली में छापा मारा गया और योगेंद्र गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि वह अशिक्षित स्थानीय लोगों को झांसा देकर बैंक खाते खुलवाता था. इन खातों की किट साथी छोटू लाल मीणा को देता था, जो सरगना राकेश मीणा को सौंप देता था. खातों की जानकारी इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की जाती थी. धोखाधड़ी से पैसे मंगाने से पहले खातों की लिमिट जांची जाती थी.
डीएसपी अमित गोयल ने बताया कि इसके बाद jaipur के सांगानेर में छापा मारकर राकेश मीणा और छोटू लाल मीणा को गिरफ्तार किया गया. छापेमारी के दौरान 1 लाख रुपए नकद, अपराध में इस्तेमाल किए गए 9 मोबाइल फोन और विभिन्न फर्जी खातों की 10 पासबुक/चेकबुक बरामद की गईं. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कंबोडिया से संचालित होने वाले गिरोह को बैंक खाते मुहैया कराए गए थे. इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों, निवेश धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों में किया जाता था.
मास्टरमाइंड राकेश मीणा ने अपने साथी छोटू लाल और योगेंद्र गुर्जर के माध्यम से बैंक खातों की डिटेल प्राप्त करते हैं. इन खातों को टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय जालसाजों के साथ साझा करते हैं. धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को इन्हीं खातों में मंगाया जाता था. बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से निकाल लेते थे और अंतरराष्ट्रीय संचालकों के निर्देशानुसार अन्य खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिससे धन के लेनदेन का पता न चल सके.
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ओपी/डीकेपी