
टोक्यो, 21 अप्रैल . जापानी Government ने रक्षा उपकरण और तकनीक निर्यात की अपनी नीति में संशोधन किया है. इसका मकसद विदेशों में हथियारों की बिक्री की इजाजत देना है. हालांकि देश में इसका बड़े पैमाने पर विरोध किया गया.
Tuesday को इसे लागू करने की गाइडलाइन में भी बदलाव का ऐलान किया गया. इन बदलावों से जापान के ‘डिफेंस इक्विपमेंट एक्सपोर्ट’ को पांच नॉन-कॉम्बैट कैटेगरी—रेस्क्यू, ट्रांसपोर्ट, वॉर्निंग, सर्विलांस, और माइनस्वीपिंग—तक सीमित करने वाले नियम खत्म हो गए हैं.
क्योडो न्यूज के हवाले से सिन्हुआ ने बताया कि, पहले की रक्षा नीति के विपरीत, डिफेंस इक्विपमेंट को “वेपन” (घातक हथियार) और “नॉन-वेपन” (गैर-घातक हथियार और रक्षा उपकरण) श्रेणी में बांटा जाएगा, इस आधार पर कि उनमें जानलेवा या विनाशकारी क्षमताएं हैं या नहीं.
इस बदलाव से वॉर्निंग और कंट्रोल रडार सिस्टम जैसे रक्षा उपकरणों को बेरोक-टोक निर्यात करने की इजाजत दे दी गई है. वहीं डिस्ट्रॉयर और मिसाइलों सहित उन हथियारों के निर्यात की भी इजाजत दी गई है, जिन पर पहले रोक थी. ये उन देशों को मुहैया कराए जाएंगे जिनसे जापान का सुरक्षा उपकरण और तकनीक को लेकर करार है.
क्योडो न्यूज ने कहा कि ये बदलाव एक ऐसे देश की डिफेंस पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव हैं, जिसने दूसरे विश्व युद्ध में हार के बाद खुद को हमेशा “शांति पसंद देश” बताया है.
हालांकि ये बदलाव असल में उन देशों को हथियार निर्यात करने पर रोक लगाते हैं जो किसी संघर्ष या लड़ाई में लगे हुए हैं, लेकिन वे “खास हालात” में जापान की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छूट देते हैं.
इस बदलाव के तहत, हथियार निर्यात के लिए पहले संसद से मंजूरी की जरूरत नहीं होगी. इसके बजाय, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद) फैसले लेगी, और मंजूरी के बाद ही डाइट को इसकी जानकारी दी जाएगी.
इस प्रक्रिया में संसद की भागीदारी को नजरअंदाज करने का विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया है. उनका तर्क है कि जापान को हथियारों की होड़ में शामिल होने से पहले पार्लियामेंट की मंजूरी जरूरी है.
जब से यह बदलाव वाला प्लान सामने आया है, इसने पूरे जापान में बहुत चिंता पैदा करती है. इस फैसले का विरोध भी हो रहा है.
16 अप्रैल को टोक्यो में Prime Minister कार्यालय के सामने एक रैली के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने “पांच-कैटेगरी की रोक हटाने का विरोध करें,” “हथियारों के एक्सपोर्ट पर रोक,” और “जापान को मौत का सौदागर नहीं बनना चाहिए” लिखे हुए प्लेकार्ड प्रदर्शित किए, और “पिछली गलतियों को न दोहराएं” और “हम युद्ध को मना करते हैं” जैसे नारे लगाए. हिस्सा लेने वालों ने चेतावनी दी कि यह कदम देश के लंबे समय से चले आ रहे शांतिवादी नजरिए से एक बड़ा बदलाव हो सकता है.
कैबिनेट और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने संशोधन को हरी झंडी ठीक उस वक्त दी जब युद्ध से जुड़े यासुकुनी श्राइन में तीन दिवसीय स्प्रिंग फेस्टिवल का आगाज हुआ. ये उत्सव जापान की सैन्य शक्ति का महिमामंडन ही नहीं करता बल्कि आक्रमकता का भी प्रतीक है.
ताकाइची ने विवादित श्राइन को एक रस्म “मसाकाकी” पेड़ का चढ़ावा भेजा, जो दूसरे विश्व युद्ध के 14 दोषी क्लास-ए जापानी युद्ध अपराधियों के प्रति सम्मान दर्शाता है.
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केआर/