दत्तात्रेय होसबोले ने पीएम मोदी के आरएसएस के साथ पुराने जुड़ाव को किया रेखांकित; वैचारिक संबंधों पर दिया जोर

वाशिंगटन, 24 अप्रैल . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने Prime Minister Narendra Modi के संघ से लंबे जुड़ाव पर गर्व जताया. उन्होंने कहा कि आरएसएस और देश की मौजूदा Government के बीच विचार और संगठन का रिश्ता काफी गहरा और पुराना है.

हडसन इंस्टीट्यूट में एक ‘फायरसाइड चैट’ में एक बातचीत के दौरान होसबोले ने साफ कहा कि पीएम मोदी की जड़ें आरएसएस में हैं और यह उनके सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व का अहम हिस्सा रही हैं. उन्होंने कहा, “यह सच है, उन्होंने खुद भी कई बार इसका जिक्र किया है और हमें इस पर बहुत गर्व है.”

यह बयान उस चर्चा के दौरान आया, जिसमें आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रिश्ते पर बात हो रही थी. होसबोले ने माना कि दोनों के बीच गहरा और लगातार जुड़ाव है. उन्होंने बताया कि जब 1980 में भाजपा बनी थी, तब इसके संस्थापकों ने आरएसएस से संबंध बनाए रखने का फैसला किया था.

उन्होंने कहा, “भाजपा के संस्थापक इस रिश्ते को बनाए रखना चाहते थे. यह ऐसा संबंध है जिसे तोड़ा नहीं जा सकता.” उन्होंने यह भी कहा कि Government में कई लोग ऐसे हैं, जिनका जुड़ाव आरएसएस से रहा है. उन्होंने कहा, “Government में जो लोग हैं, उनका बैकग्राउंड आरएसएस से जुड़ा हुआ है.”

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि आरएसएस सीधे तौर पर Government के फैसलों में दखल नहीं देता. उन्होंने कहा, “आरएसएस India Government की राजनीति में सीधे शामिल नहीं होता.” साथ ही उन्होंने जोड़ा कि संगठन हमेशा उन नीतियों का समर्थन करता है जो देशहित में हों.

होसबोले ने बताया कि आरएसएस की भूमिका राजनीति में सीधे हस्तक्षेप करने की नहीं, बल्कि लंबे समय तक समाज और संस्कृति पर सकारात्मक प्रभाव डालने की है. संगठन सेवा, अनुशासन और सामाजिक एकता पर आधारित स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार करता है.

चर्चा में आरएसएस के विकास का भी जिक्र हुआ—कैसे यह कुछ लोगों के छोटे समूह से शुरू होकर आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में बड़ा प्रभावशाली संगठन बन गया है. इस पर होसबोले ने विनम्रता पर जोर देते हुए कहा कि सफलता के साथ अहंकार नहीं, बल्कि नम्रता आनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “हम पूर्ण नहीं हैं… और नहीं बनेंगे… ताकत के साथ विनम्रता भी जरूरी है.”

उन्होंने दोहराया कि आरएसएस आगे भी “निस्वार्थ स्वयंसेवक” तैयार करने का काम करता रहेगा, जो समाज और मानवता की सेवा के लिए समर्पित हों. साथ ही उन्होंने कहा कि India को आधुनिक बनते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों को नहीं छोड़ना चाहिए.

यह बातचीत ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ के दौरान हुई, जिसमें नीति निर्माता, विद्वान और रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल हुए थे. इसमें India के उभार और उसके वैश्विक संबंधों पर चर्चा की गई.

Prime Minister Narendra Modi ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत आरएसएस के प्रचारक के रूप में की थी. उन्होंने कई बार माना है कि उनकी सोच और Political प्रशिक्षण पर आरएसएस का गहरा प्रभाव रहा है. 1925 में स्थापित आरएसएस आज दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक है, जिसका देशभर में व्यापक नेटवर्क है और जिसने India के सामाजिक और Political जीवन में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

एएस/

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