
लेह, 28 जून . तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा Sunday को दो महीने के वार्षिक ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए लद्दाख पहुंच गए हैं.
अधिकारियों के अनुसार, 14वें दलाई लामा अपने वार्षिक विस्तारित ग्रीष्मकालीन प्रवास के तहत केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख पहुंचे, जहां वह दो महीने प्रवास करेंगे.
यह यात्रा दिल्ली में हाल ही में कराए गए उनके चिकित्सा उपचार के बाद हो रही है.
लद्दाख प्रवास के दौरान दलाई लामा विभिन्न धार्मिक प्रवचनों, जनसंपर्क कार्यक्रमों और विशेष आयोजनों में भाग लेंगे.
यात्रा से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, लेह प्रशासन ने लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन (एलबीए) और लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन (एलजीए) के साथ मिलकर उनके प्रवास और आगामी कार्यक्रमों के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं.
दलाई लामा जुलाई और अगस्त के कुछ दिन तक लद्दाख में रहने वाले हैं.
हाल ही में उनके घुटने की सर्जरी हुई है और उन्हें पर्याप्त आराम की आवश्यकता है. इसी कारण इस वर्ष सार्वजनिक प्रवचनों और लोगों से मुलाकात के कार्यक्रमों की संख्या सीमित रहने की संभावना है.
6 जुलाई को उनका 91वां जन्मदिन भी लद्दाख में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा.
आयोजकों ने बताया कि धार्मिक शिक्षाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों का विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा.
दलाई लामा के लद्दाख पहुंचने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और बौद्ध समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत किया और उनके वार्षिक दौरे पर खुशी व्यक्त की.
14वें दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को हुआ था. उनका पूरा आध्यात्मिक नाम ‘जेत्सुन जाम्फेल नगवांग लोबसांग येशे तेनजिन ग्यात्सो’ है. उन्हें संक्षेप में तेनजिन ग्यात्सो कहा जाता है. वह तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं.
वर्ष 1959 तक वह तिब्बत के आध्यात्मिक और Political नेता रहे. इसके बाद उन्होंने निर्वासित तिब्बती प्रशासन का नेतृत्व किया, जिसका मुख्यालय Himachal Pradesh के धर्मशाला में स्थित है.
तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुसार, दलाई लामा को करुणा के बोधिसत्व अवलोकितेश्वर (तिब्बती में चेनरेजिग) का पुनर्जन्म माना जाता है.
उनके अनुयायी और दुनिया के कई लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘हिज होलीनेस दलाई लामा’ कहकर संबोधित करते हैं. वह तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलुग संप्रदाय के प्रमुख आध्यात्मिक नेता और एक बौद्ध भिक्षु हैं.
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एएमटी/डीकेपी