
New Delhi, 16 मई . वट सावित्री व्रत और शनि अमावस्या के पावन अवसर पर Saturday को देशभर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिरों और पवित्र स्थलों पर उमड़ी है. प्रयागराज के त्रिवेणी संगम से लेकर हरिद्वार की हर की पौड़ी तक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना कर परिवार व विश्व कल्याण की कामना की.
प्रयागराज में सुबह से ही लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर स्नान के लिए पहुंचे. विवाहित महिलाओं ने स्नान के बाद बरगद के पेड़ की पूजा कर अपने पतियों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की.
एक महिला श्रद्धालु ने से बात करते हुए कहा, “आज वट सावित्री व्रत है, जिसका बहुत अधिक महत्व होता है. विवाहित महिलाएं यहां आती हैं, पूजा-अर्चना करती हैं और धार्मिक अनुष्ठान करती हैं.”
एक व्यक्ति ने कहा, “आज हम यहां संगम में पवित्र डुबकी लगाने आए हैं. आज शनि अमावस्या है, जो कि एक बहुत ही महत्वपूर्ण अमावस्या मानी जाती है. स्नान करने के बाद, हमने सभी लोगों के कल्याण और पूरे विश्व के मंगल के लिए प्रार्थना की.”
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने कहा, “आज की अमावस्या को अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे ‘बरगदही अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है. पूरे India में, हिंदू महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और धार्मिक अनुष्ठान करती हैं. इस दिन, महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं. साथ ही, यह भी माना जाता है कि ऐसा करने से उनकी स्वयं की आयु में भी वृद्धि होती है. आज भगवान शनि का जन्मोत्सव भी है.”
वहीं, दिल्ली के नजफगढ़ स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली. महिलाओं ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ व्रत और पूजा-अर्चना की.
उधर, हरिद्वार में हर की पौड़ी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया. सुहागिन महिलाओं ने बरगद के पेड़ों के पास पूजा कर अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना की. एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “आज के दिन बरगद की पूजा होती है. सुहागिन महिलाएं स्नान करती हैं, अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं.”
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा, “जब सत्यवान का जीवन समाप्त होने वाला था, तब देवी सावित्री ने यह व्रत रखा था और तब से यह परंपरा चली आ रही है. वह अपने पति का जीवन यमराज से वापस ले आई थीं. आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज शनि देव जयंती है और आज अमावस्या के साथ-साथ Saturday भी है, जो इसे एक बहुत ही विशेष संयोग बनाता है. जो लोग आज शनिदेव की पूजा करेंगे, उनकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी.”
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डीसीएच/