सीपीआई ने ‘मनरेगा’ मुद्दे को लेकर एआईएडीएमके पर विश्वासघात का आरोप लगाया

चेन्नई, 7 फरवरी . कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने Saturday को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) पर तीखा हमला बोला. उन्होंने एआईएडीएमके पर केंद्र Government द्वारा मनरेगा कमजोर करने का समर्थन करके कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया.

सीपीआई के प्रदेश सचिव एम. वीरपांडियन ने एक कड़े बयान में कहा कि राज्य Government द्वारा ग्रामीण रोजगार योजना के कार्यान्वयन के खिलाफ एआईएडीएमके का प्रस्तावित विरोध भ्रामक और Political अवसरवादी है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र के इस अधिकार-आधारित कार्यक्रम को कमजोर करने के प्रयासों का समर्थन कर रहा है.

कानून की उत्पत्ति को याद करते हुए, वीरपांडियन ने बताया कि मनरेगा को 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन Government के तहत वामपंथी दलों के समर्थन से लागू किया गया था. यह कानून शारीरिक श्रम करने के इच्छुक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 100 दिनों का वेतनभोगी रोजगार की गारंटी देता है.

उन्होंने बताया कि जब यह ऐतिहासिक कानून पारित हुआ था, तब एआईएडीएमके का Lok Sabha में कोई प्रतिनिधित्व नहीं था.

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 2014 से 2020 के बीच, जब केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन सत्ता में था और तमिलनाडु में एआईएडीएमके की Government थी, तब राज्य नेतृत्व चुप रहा, जबकि इस योजना के लिए आवंटित धनराशि में कटौती की गई और ग्रामीण परियोजनाओं के लिए निर्धारित धनराशि का दुरुपयोग किया गया.

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोग इस चुप्पी को नहीं भूले हैं.

वीरापांडियन ने दावा किया कि दिसंबर 2025 में, केंद्र Government ने कानूनी रूप से गारंटीकृत योजना को एक नए कार्यक्रम से बदलने की योजना की घोषणा की, जिसे वैधानिक समर्थन प्राप्त नहीं है. उनके अनुसार, इस कदम से तमिलनाडु के एक करोड़ से अधिक कृषि श्रमिकों, छोटे किसानों और सीमांत परिवारों को सुनिश्चित रोजगार के उनके अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा.

एआईएडीएमके द्वारा राज्य Government की आलोचना को निराधार बताते हुए सीपीआई नेता ने कहा कि तमिलनाडु के सामने असली चुनौती केंद्र Government द्वारा बजट सहायता में बार-बार की जा रही कटौती है.

सीपीआई राज्य कार्यकारिणी ने कहा कि एआईएडीएमके का 13 फरवरी को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने वाली नीतियों का समर्थन करने के उद्देश्य से किया जा रहा है.

एमएस/

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