
New Delhi, 14 अप्रैल . Enforcement Directorate (ईडी) ने Monday रात को इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (आई-पैक) के निदेशक विनेश चंदेल को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत चल रही जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है. विनेश चंदेल आई-पैक के संस्थापक, निदेशक और 33 फीसदी शेयरधारक हैं. कोर्ट ने Wednesday मध्य रात्रि को विनेश चंदेल को 10 दिन की हिरासत में भेज दिया है.
ईडी ने दिल्ली Police द्वारा दर्ज First Information Report के आधार पर जांच शुरू की. अब तक की जांच में आई-पैक द्वारा वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न तरीकों के कई मामले सामने आए हैं. इसमें हिसाब-किताब वाले और बिना हिसाब-किताब वाले फंड की प्राप्ति, बिना किसी व्यावसायिक प्रमाण पत्र के असुरक्षित ऋण प्राप्त करना, फर्जी बिल और इनवॉइस जारी करना, तीसरे पक्ष से धन प्राप्त करना और अंतरराष्ट्रीय हवाला के माध्यम से नकदी का लेन-देन शामिल है.
जांच में यह भी पता चला है कि आई-पैक करोड़ों रुपये के आपराधिक धन को मनी लॉन्ड्रिंग करने में शामिल थी. अब तक बरामद की गई राशि लगभग 50 करोड़ रुपये है.
जांच के दौरान, लेन-देन से जुड़े विभिन्न व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए. तलाशी भी ली गई और आपत्तिजनक सामग्री एकत्र की गई. जांच के दायरे में आए अपराध में विनेश चंदेल की भूमिका सामने आई है. कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत, कंपनी के निदेशक उस स्थिति में उत्तरदायी होते हैं, जब अपराध उनकी सहमति, मिलीभगत या लापरवाही से किया गया हो.
गिरफ्तारी के बाद विनेश चंदेल को पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष पेश किया गया. सुनवाई Monday देर रात तक चली. इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने विनेश चंदेल को 10 दिन की हिरासत में भेज दिया. ईडी अब पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी.
वहीं, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने विनेश चंदेल की गिरफ्तार पर चिंता जताई है. उन्होंने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की पश्चिम बंगाल चुनाव से लगभग 10 दिन पहले गिरफ्तारी केवल चिंताजनक ही नहीं है बल्कि यह ‘समान अवसर’ की भावना को भी हिला देती है. जब पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की ओर बढ़ना चाहिए, ऐसे समय में इस तरह की कार्रवाई यह संदेश देती है कि अगर आप विपक्ष के साथ काम करते हैं तो आप भी अगला निशाना बन सकते हैं. यह लोकतंत्र नहीं बल्कि डराने की स्थिति है.”
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ओपी/पीएम