
New Delhi, 22 मई . दिल्ली की कोर्ट ने Friday को कथित आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर अपना फैसला 9 जून तक टाल दिया. इस मामले की जांच ईडी कर रही है.
राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाने की तारीख 9 जून तक टाल दी है. Enforcement Directorate (ईडी) का यह मामला कथित आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े अपराध की आय को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के जरिए छिपाने से संबंधित है. इस घोटाले का मूल मामला सीबीआई ने दर्ज किया था.
जांच एजेंसी का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में आईआरसीटीसी होटलों के संचालन के ठेके देने में अनियमितताएं की गईं.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, होटल रखरखाव के ठेके निर्धारित नियमों का पालन किए बिना एक निजी कंपनी को दिए गए, जो कथित तौर पर राजद प्रमुख के करीबी सहयोगियों से जुड़ी थी.
यह भी आरोप है कि इसके बदले में लगभग तीन एकड़ की कीमती जमीन एक बेनामी कंपनी के जरिए हासिल की गई, जिसका संबंध कथित तौर पर लालू यादव के परिवार और सहयोगियों से था.
मामले के आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव समेत अन्य लोग शामिल हैं.
इससे पहले आरोपियों के वकीलों और ईडी की ओर से विस्तृत दलीलें पेश करने के बाद विशेष न्यायाधीश ने आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.
वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट में भी लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं लंबित हैं. इन याचिकाओं में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें इसी घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था.
पिछले साल अक्टूबर में राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप तय किए थे. आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया था.
लालू यादव लगातार आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उनका कहना है कि आईआरसीटीसी होटलों के टेंडर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दिए गए थे.
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पीएम